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क्या है डिजिटल भारत परियोजना?

यह परियोजना वर्तमान सरकार की शीर्ष प्राथमिक परियोजनाओं में से एक है।
यह भारत के विकास के लिए बनाई गई एक परियोजना है। इसकी कार्य अवधि 26 नवंबर 2014 से 2019 के बीच है। डिजिटल भारत देश को सशक्त और ज्ञानपूर्ण अर्थव्यवस्था देने के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है । यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा परिकल्पित किया गया है। जिस से भारत तेज़ी से प्रगती पथ पर अग्रसित हो सके ।

डिजिटल भारत विकास के नौ क्षेत्रों पर बल डालेगा। जो निम्नलिखित हैं-

1. ब्रॉडबैंड राजमार्ग
2. मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए सार्वभौमिक पहुँच
3. पब्लिक इंटरनेट एक्सेस कार्यक्रम
4. ई-शासन – प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार में सुधार
5. ई-क्रांति – सेवा की इलेक्ट्रॉनिक डिलिवरी,
6. सूचना,
7. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण,
8. नियुक्ती के लिए
9. अर्ली हार्वेस्ट कार्यक्रम

क्या किया जा रहा है?

इसमें उच्च गति के इंटरनेट नेटवर्क के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने की योजना शामिल है। डिजिटल भारत के तीन मुख्य घटक हैं-
1 डिजिटल बुनियादी ढांचे का निर्माण
2 डिजिटल सेवाओं का समुचित वितरण
3 डिजिटल साक्षरता हैं।

इस योजना में सरकारी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप दिया जाना है। जिससे कागजी कार्रवाई को कम किया जा सके। इसमें सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ताओं दोनों के फायदे के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराया जाएगा।

योजना का संचालन-

यह योजना संचार मंत्रालय और आईटी की अध्यक्षता में क्रियान्वित हो रहा है। इसे डिजिटल भारत सलाहकार के समूह द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। यह भारत के सभी मंत्रालयों और विभागों को डिजिटल बनाएगा। यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत किया जाएगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र का पुनर्गठन करने की योजना भी हैं।

डिजिटल भारत के सामने चुनौतियां

भारत इस क्षेत्र में अभी अपेक्षित ऊचाँइयों तक नहीं पहुच पाया है। इसलिए सबसे पहले आवश्यक है कि भारत में साइबर सुरक्षा नीति को मजबूत बनाया जाय। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति 2013 साइबर कानून को सही प्रकार से लागू करने किया जाये। जिससे साइबरस्पेस के जोखिम को कम किया जा सके। इस परियोजना में ई-कचरा प्रबंधन पर उचित ध्यान देने की जरूरत होगी। साथ-साथ ई-निगरानी, नागरिक अधिकारों के दुरुपयोग को रोकने की व्यवस्था, कानूनी ढांचे में ई- सुरक्षा संबंधी नियम बनाने और लागू करने जैसी चुनौतियाँ है। साथ हीं डेटा संरक्षण कानून, गोपनियता, जैसे विषयों का प्रबंधन भी एक चुनौती होगी।

डिजिटल भारत की  वर्तमान स्थिति

शीर्ष समिति बहुत जल्द ही इसकी प्रगति का विश्लेषण करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों ने भी डिजिटल भारत के लिए नीतियों के विकास की ओर संकेत किया है। टेलीकॉम मंत्री श्री रवि शंकर ने बताया है कि इस परियोजना से रोजगार की संभावना भी काफी बढेंगी। कई कंपनियों ने इस परियोजना में अपनी रुचि दिखाई है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में श्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल भारत के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।

विश्व के विकास पटल पर भारत

हर साल विश्व आर्थिक मंच इनसीड के साथ सहयोग में वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी रिपोर्ट प्रकाशित करता है। यह विभिन्न देशों में अनुसंधान, नेटवर्क तत्परता, अर्थव्यवस्था आर्थिक विकास के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ जैसे विषयों का व्यापक आकलन करता है।
इस रिपोर्ट में भारत 83 वें स्थान पर है। इंडोनेशिया, थाईलैंड , ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका  श्रीलंका, और फिलीपींस जैसे देशों से भारत पीछे है।

भारत ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं रिपोर्ट में भी भारत का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है। । रिपोर्ट के अनुसार भारत में बुनियादी डिजिटल सुविधाओं की कमी, नेटवर्क तत्परता में कमी, राजनीतिक, विनियामक और कारोबारी माहौल की गुणवत्ता में कमी है। जो विकास में बाधक बनी हुई है।

भारत आज विश्व का सबसे युवा देश है। अर्थात हमारे यहाँ हमारी बहुत बड़ी जनसंख्या युवा वर्ग की है। अतः हमारे देश में विकास की अपार संभावनाएं है। यह  नई खोजों और आधुनिकीकरण की ओर हमारा मार्ग प्रशस्त करेगा ।  ऐसे में यह परियोजना बहुत मददगार सिद्ध होगी। इसके लिए हमारे देश में डिजिटल कौशल और बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराना जरूरी है।

http://www.intel.in/

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