मैं एक लड़की ( कविता 2)

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मैंने आँखें खोली ,
देखा  मेरी  माँ की
आँखों मे खुशी के आँसू है.
मेरे पिता बोल रहे हैं –

इतना पूजा जतन किया
टोना -टोटका किया.
फिर दूसरी बार भी लड़की ?
बड़ी बेकार औरत हो तुम.

 

 

images taken from internet.

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18 thoughts on “मैं एक लड़की ( कविता 2)

  1. Aise logon ko boliye… Ye lijiye aapki vichar. Gira hua pada tha.. Beti hone se kuch bhi nuksaan nai hota rekha hi. Balki mujhe to bahot khushi hain… Kis yug me hain aise log pata nai

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    1. आपका प्रश्न मुझे अच्छा लगा.
      यह ख़याल बहुत समय से मेरे जेहन में था. बस शब्दों में ढाल नहीँ पा रही थी.
      मेरा research work महिलाओं पर आधारित है. इसलिये बहुत सी महिलाओं से बात करने का मौका मिला. बहुत से अनुभव share किये. उनकी बहुत सी कहानियाँ सुनी. मेरी कहानिया बगुला भगत, किराये का चंडाल पुत्र और रंगीली ऐसी ही सच्ची कहानियाँ हैं.
      मेरी भी दो बेटियाँ है. कुछ अपने अनुभव , कुछ दूसरों के दर्द से ये कवितायें बन गई.

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      1. आपने इस काम में हाथ बंटाना चाहा. किसी के दर्द और तकलीफ महसूस करना बहुत बड़ी बात हैं. इसके लिये बहुत धन्यवाद.
        मेरा research work /Phd काफी पहले पूरा हो चुका है. ये तभी के अनुभव हैं.

        Liked by 1 person

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