हिन्दी – एक वैज्ञानिक भाषा Hindi -A scientific language.

This post is dedicated to my blogger  buddies , who wants to learn  and write in Hindi.

यह गर्व की बात हैं कि  हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है. इसकी विशेषताएं हैं –

1. जो लिखते हैं ,वही पढ़ते हैं और वही बोलते हैं.

2.  उच्चारण सही हो, तब सुन कर लिख सकते हैं.

3. वाक्य सम्बोधन  बड़े या छोटे के लिये अलग अलग होते हैं. जैसे आप ,तुम.

4. वाक्य शुरू करनेवाले  विशेष अक्षर ( capital ) नहीँ     होते.

  वैज्ञानिक कारण –

 अक्षरों का वर्गीकरण, बोली  और उच्चारण के अनुसार हैं. “क” वर्ग  कंठव्य कहे जाता हैं , क्योंकि इसका कंठ या गले से हम उच्चारण करते हैं.बोलने के समय जीभ गले के ऊपरी भाग को छूता हैं. बोल कर इसे  समझा जा सकता हैं.

क, ख, ग, घ, ङ.

इसी तरह “च ” वर्ग के सब अक्षर तालव्य कहलाते हैं.इन्हें बोलने के  समय जीभ तालू  को छूती है ।

च, छ, ज, झ,ञ

    “ट”  वर्ग मूर्धन्य कहलाते हैं. इनके  उच्चारण के समय जीभ  मूर्धा से लगती  है ।

ट, ठ, ड, ढ ,ण

त ” समूह के अक्षर दंतीय कहे जाते हैं. इन्हें बोलने के  समय जीभ दांतों को छूता हैं.

त, थ, द, ध, न

“प ” वर्ग ओष्ठ्य कहे गए, इनके  उच्चारण में दोनों ओठ आपस में मिलते  है।

प , फ , ब ,भ , म.

इसी तरह दंत ” स “, तालव्य  “श ” और मूर्धन्य “ष” भी बोले और लिखे जाते हैं.

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30 thoughts on “हिन्दी – एक वैज्ञानिक भाषा Hindi -A scientific language.

  1. हिंदी दिवस के उप्लक्ष में मुझे अखबार से छपी खबर से पता चला की हिंदी भाषा में लाखों ब्लॉग है। अनेक हिंदी के ब्लॉग मै पढता भी हूँ और अगर कोई टिपण्णी करनी हो तो हिंदी में ही करता हूँ। यही शायद सही होगा।
    जो पढने का आनंद हिंदी में आता है वो अन्य भाषा में नहीं। हो सकता है इसका कारण ऊपर लिखा भी हो कि हिंदी में उच्चारण वही होता है जो लिखा हो और यह हमारे रोज की बोलचाल की भाषा है।

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    1. Arv आपकी बात मुझे अच्छी लगी. -“हिंदी पढ़ने में…..” हिंदी , संस्कृत से आई हैं. संस्कृत को देव भाषा कहते हैं. देव भाषा पढ़ने में आनंद तो आयेगा न ? मेरे पोस्ट पढ़ने के लिये धन्यवाद. 😊

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      1. Dear. I thank you but when I started the blog five years ago l don’t accept award. It’s a matter of principles. Anyway I again thanks my dear friend! Hugs from Italia by Rinaldo. Ciao!

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  2. आप और हम सभी उड़ने का स्वप्न देख रहे हैं दोस्त…
    अपनी अपनी कलम से…
    कलम के बिषय में मेरी सोच यह है कि
    साधारण मनुष्सय और पशु जन्म, पोषण, प्रजनन और मृत्यु के सामान्य चक्र में आने जाने के बीच
    केवल स्वहित संवेदी होते हैं, विचारवान अपने साथ-साथ अपने सरोकारों के प्रति भी संंवेदनशील होता है…
    और वही सपनों को जन्म देकर, कलम को कागज पर शब्द उगलने विवश भी करता है…
    सपने जरूरी हैं …
    बड़े सपने…
    सपने होंगे तब ही तो सच होंगे !!!
    ज्ञानीजन ऐसा कहते रहे हैं .
    .
    आपका ब्लाग ही आपके सपनों को सच करने में
    बहुत बड़ा सहयोगी हो सकता है….
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    …. साथ पाइये, हमारा लेखन हिन्दुस्तानी के वर्तमान और भावी सदस्यों का!!!!!!
    (व्यक्तिगत संदेश पर विस्तृत जानकारी पाइये, हमें फालो कीजिये… अभी …)
    – सत्यार्चन

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