तो लोग क्या कहेगें? (कविता)

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पूरे आस-विश्वास के साथ वह लौटी पितृ घर,

पिता की प्यारी-लाङली

पर ससुराल की व्यथा-कथा सुन,

सब ने कहा- वापस वहीं लौट जा।

किसी से कुछ ना बता,

वर्ना लोग क्या कहेगें ?

इतने बङे लोगों के घर की बातें बाहर जायेगी, तो लोग क्या कहेगें?

( लोग सोचतें हैं, घर की बेटियों को परेशानी में पारिवारिक सहायता मिल जाती है। पर पर्दे के पीछे झाकें बिना सच्चाई जानना मुशकिल है। कुछ बङे घरों में एेसे भी ऑनर किलिंग होता है)

Source: तो लोग क्या कहेगें? (कविता)

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11 thoughts on “तो लोग क्या कहेगें? (कविता)

      1. Wo toh Sahi kahi aapne… Samaj ke niyam ki chakkar me najane kitne ghatna ghati chali aayi hai… parde ke piche ki baat kisne suni hai … Kehne ko hi ijazat nahi Dete hai… Yehi hamne dekhi hai….

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