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मृत कल अौर अजन्मा कल – कविता ” Dead yesterday n unborn tomorrow” -Poem #celebrateTodayThisMoment


Indian Bloggers

“Dead yesterday n unborn tomorrow , why fret about them , if today be sweet.”

कहते हैं, बीती ताहि बिसार दे , आगे की सुधि ले..

 जो बीत गई सो बात गई!!

पर बीता इतिहास तो सबक देता है।

गर उसे बोझ ना बना लें हम,

आनेवाला दिन , क्या होगा कैसा होगा?

भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है? कौन जाने?

भविष्यनिर्माण योजना ना बनायें?

यह सपना भी तो जरुरी है।

पर यह ख्याल, यह फलसफा भी बुरा नहीं-

“कल हो ना हो……

इस क्षण  को जी लें आज ”

भविष्य के दिवा स्वप्न ,

भूत के बोझ

मृत कल अौर अजन्मे कल की चिंता क्यों?

गर आज  मधुर, खुशनुमा हो…….

शब्दार्थ-

दिवा स्वप्न – day dreaming

बिसार – forget

भविष्यनिर्माण योजना- future planning

भूत- Past

Indispire Topic-

Regretting the past and worrying about the future will further flatten the time in which you are living and celebrate today and try to employ the most of it.Write a post on the celebration of Today ..This moment is the only truth. #CelebrateTodayThisMomen

image from internet.

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Author:

I am PhD. in Psychology, a PGDM in HR, hold a certificate in Child Guidance and Counsel ling and a writer, not necessarily in that order. My work experience includes teaching MBA students in Usha Martin and Amity Colleges in Patna and teaching Psychology in various college of Patna to B.A. and M.A. students and to law students in Swami Vivekanand law College in Lucknow. I've also taught primary school students in DPS, Dhanbad. I got married at the age of 19, in my first year of BA Psychology Hons. I finished my studies and developed my interest in women and children studies in India. My thesis is about the urban, educated Indian women. I have written Hindi articles for Hindustan, Dhanbad and the MA Psychology study course for Nalanda Open University in Patna. My interest in writing is something that happened subconsciously. But lately, after having written deep, psychological and spiritual articles and having produced books for Post Graduate Psychology students, I realized how much I love writing for children. I find it refreshing and heartening to write about their innocence, faith, fears and fearlessness. My two daughters have grown on a staple diet of magic and fairy tales and I must confess that I have enjoyed their childhood perhaps more than they did themselves. I wish to keep writing for these little people who are the bright future of our country, our civilization and our world.

35 thoughts on “मृत कल अौर अजन्मा कल – कविता ” Dead yesterday n unborn tomorrow” -Poem #celebrateTodayThisMoment

    1. Lovely line -“Yesterday is history, tomorrow is a mystery .” Yes Abhi ji, there are number of thoughts and philosophy regarding this. I always loved Omar Khyyams ‘s saying –
      Dead yesterday n unborn tomorrow , why fret about them , if today be sweet.

      Like

  1. पर यह ख्याल, यह फलसफा भी बुरा नहीं-

    “कल हो ना हो……

    इस क्षण को जी लें आज ”

    भविष्य के दिवा स्वप्न ,

    भूत के बोझ

    मृत कल अौर अजन्मे कल की चिंता क्यों?

    गर आज मधुर, खुशनुमा हो…
    बहुत खूब ! सार्थक शब्द

    Liked by 1 person

      1. योगी जी, आपने मेरी काविता को मेरे सामने बङे खुबसूरत तरिके से प्रस्तुत किया है। फिर से धन्यवाद।

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  2. बहुत सुंदर कविता है रेखा जी आपकी और इस विचार से असहमत होने की कोई गुंजाइश नहीं क्योंकि कहते हैं न कि जो बीत गया उसे क्या याद करना और आने वाला कल किसने देखा है ? आने वाला पल जाने वाला है, हो सके तो इसमें ज़िंदगी बिता दो, पल जो ये जाने वाला है । आगे भी जाने ना तू, पीछे भी जाने न तू, जो भी है, बस यही एक पल है । है ना ? लेकिन रेखा जी, गुजरे हुए कल की यादों की अपनी कीमत, अपनी वक़त होती है । ज़िंदगी के हर पल का लुत्फ़ उठाते हुए हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आने वाला पल इक सपना है, गुज़रा हुआ कल बस अपना है, हम गुजरे हुए कल में रहते हैं, यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं । बुरी यादें अपने आप ही हमसे जुड़ी रहती हैं लेकिन अच्छी यादों को तो संजोना पड़ता है । जीवन के मधुर क्षणों को अपनी स्मृतियों में संजोकर ही तो हम उन्हें बार-बार जी पाते हैं । इसलिए अतीत के मूल्य को भी स्वीकार करना चाहिए और भविष्य के लिए आशान्वित भी रहना ही चाहिए क्योंकि अंततः जीवन और संसार आशा पर ही तो टिके रहते हैं । उत्कृष्ट कविता के लिए आपका अभिनंदन ।

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    1. आपके तारीफ का अंदाज़ हमेशा की तरह बेहद खुबसूरत और अनोखा है. मुझे आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहता है.
      आपने बड़े अच्छे गाने के उदाहरण से मेरी कविता के अर्थ को और अर्थपूर्ण बना दिया.
      आपकी बाते सही है , इतिहास और यादों का अपना मोल है. उन्हे सँजो कर रखना हम सबों के स्वभाव में होता है.
      अगर हम आज में खुबसूरत जिंदगी जीते है , तब वह भी कल, बीते पल के खजाने में यादगार बन जायेगा. 😊😊

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      1. जी बिलकुल । आज के खूबसूरत पल ही कल रत्न बनकर खुशनुमा यादों के ख़ज़ाने में जमा हो जाते हैं ।

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