शालिग्राम और नर्मदा ( कविता ) #SelfDiscovery – poetry


Indian Bloggers


 

stock-photo-shivling-statue-representing-a-form-of-lord-shiva-in-the-premises-of-naina-devi-temple-200701106

 

एक पत्थर ने पूछा शालिग्राम से।

तुम चिकने हो, सलोने हो इसलिए

पूजे जाते हो?

हमें तो ना कोई पूछता है।

ना ही पूजता है।

शालिग्राम ने कहा- मैं भी तुम जैसा ही था।

नोकदार रुखड़ा, पत्थर का टुकड़ा।

पर मैंने अपने को छोड़ दिया

नदी के प्रवाह में, नियंता के सहारे।

दूसरों को चोट देने के बदले चोटें खाईं।

नर्मदा ने मुझे घिस – माँज कर ऐसा बनाया।

क्या तुम अपने को ऐसे को छोड़ सकोगे?

तब तुम भी शिव बन जाओगे, शालिग्राम कहलाओगे।

( ऐसी मान्यता है कि नर्मदा नदी के पत्थरों से स्वाभाविक और उत्तम शिवलिंग बनते हैं। हमारा जीवन भी ऐसा हीं है। जीवन के आघात, परेशनियाँ, दुःख-सुख हमें तराशतें हैं, हमें चमक  प्रदान करते हैं । )

 

शब्दार्थ -word meaning

शालिग्राम- शिवलिंग

नियंता – ईश्वर, भगवान

प्रवाह – धार, बहाव

नर्मदा – नर्मदा नदी

 

 

images from internet.

Life is a journey of self discovery. Describe your journey till now or a part of your journey which brought to closer to a truth about life or closer to your soul and self-discovery. #SelfDiscovery

Source: शालिग्राम और नर्मदा ( कविता )