मौसम के साथ उङते प्रवासी परिंदे- कविता Migratory birds – Poem

Research reveals that global warming is compelling birds into early migration. Migrating birds are arriving at their breeding grounds earlier as global temperatures rise.

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मौसम के साथ उङते रंग- बिरंगे परिंदे,
कुदरत के जादुई रंगों के साथ,

जहाँ का मौसम माकूल – माफिक हो 

वहीं चल देते हैं। 

हमारी तरह बंधनों से बंधे नहीं हैं। 

ये बंधनों से ऊपर, घुमक्कड़  बंजारों से।

थके,-हारे, हजारों मीलों से उङ कर आते हैं।

हम आशियाना  अौर समाज के बंधन से बंधे लोग

इन की प्राकृतिक जीवन को समझे बिना।

नैसर्गिक सृष्टि के नियम से छेङ-छाङ कर,

इन्हें तकलीफ पहुँचाते हैं। 

शब्दार्थ- Word meaning

घुमक्कड़, बंजारा – gypsy

माकूल,  माफिक – suitable

कुदरत,सृष्टि – nature,

सृष्टि – Creation

नैसर्गिक – Natural

प्रवासी – Migratory

Image from internet.

Images courtesy  Chandni Sahay.

कीमा – पत्ता गोभी रोल Keema-Cabbage rolls

 

Healthy, tasty and easy  Recipe

सामान-

कीमा- १०० ग्राम

पिसा लहसुन अौर अदरक – १ चम्मच

चाट मसाला – 1 चम्मच

पत्ता गोभी –  आधा

सॅास – ४ चम्मच

अोलिव आॅयल – २ चम्मच

नमक –

हरी मिर्च- २

बनाने का तरीका-

कीमा, पिसा लहसुन – अदरक,   चाट मसाला अौर नमक अच्छी तरह  मिलाए । आधा कटे  पत्त्ता गोभी  के  ऊपर के कुछ पत्ते  हटायें। अब सावधानी से मुलायम पत्त्ते निकालें ताकि वे टूटें नहीं। चार पत्त्ते लें। प्रत्येक पत्ते के एक तरफ  १-१ चम्मच सॅास, चाट मसाला अौर नमक लगायें। अब  पत्ते के बीच एक लाईन में कीमा रखें, पत्ते को मोङे अौर सावधानी से रोल करें। चारो रोल प्लेट में  इस तरह रखें जिस से वह खुलने नहीं पाये। हरी मिर्च में चीरा लगा कर  नमक ङालें । रोल अौर हरी मिर्च  माइक्रोवेव में ४-५ मिनट पकायें। रोल पर थोङा अोलिव आॅयल ङालें। साॅस ङाल कर गर्म सर्व करें।

 

 Ingredients  –

Keema- 100g

garlic- ginger paste – 1 tablespoons

chat mashala – 1 tablespoons

Cabbage – half

tomato Sauce – 4 tablespoons

olive Oil – 2 tsp

Salt –

Green chille – 2

Method

Mix   Keema, garlic- ginger paste, chat masala and salt.

Take 4 soft leaves of Cabbage. brush tomato Sauce,chat mashala and Salt on it.

Put keema mix  on cabbage leaves and roll carefully. Prepare all four rolls. Slit green chillies and sprinkle some salt.

Cook rolls and chilli for 4-5 minutes in microwave. Brush olive Oil. Serve hot with tomato sauce.

विज्ञान की नई खोज- किमेरा भ्रूण(chimera embryos -growing spare human organs in other animals)

Scientists Create First Human-Pig Chimeric Embryos  – Researchers may one day overcome the problem of organ shortages for transplantation by growing spare human organs in other animals. A group led by scientists at the Salk Institute for Biological Studies has taken the first big step toward making this a reality  (on January 26 , 2017 ) in Cell, they report having grown the first human-pig chimeric embryos.

हर साल दुनिया में हजारों लोगों की मृत्यु मानव अंगों की कमी की वजह से होती हैं। लगभग हर दस मिनट में  एक न एक व्यक्ति  अंग प्रत्यारोपण के लिए  प्रतीक्षा सूची में जोड़ा जाता है और हर दिन, उस सूची में 22 लोगों को अंग की जरूरत पूरी नहीं होने से  मर जाते हैं।

कैलिफोर्निया में सॉल्‍क इंस्‍टीट्यूट फोर बायलॉजिकल स्‍टडीज, अमेरिका के वैज्ञानिकों ने  सुअरों के अंदर इंसानी अंग उगाने के प्रयोग कि‍या हैं । 26 जनवरी, २०१७ को   वैज्ञानिकों ने एक उल्लेखनीय घोषणा की ।  वे पहली बार सफल मानव पशु संकर बनाने में सफल हुए हैं। पहला मानव-सुअर संकर भ्रूण प्रयोगशाला में बनाया गया है।  अभी प्रयोग शुरुआती दौर में है। पर वैज्ञानिकों  विश्वास है कि एक दिन प्रयोगशाला में मानव अंग  विकसित  अौर प्रत्यारोपित किये जा सकगें।

इस प्रक्रिया के तहत मरीज के ही शरीर की मूल कोशिकाओं को सूअर  के शरीर में विकसित किया जा सकेगा। एक बार अंगों के विकसित हो जाने पर उसे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट  किया जा सकता है। ये अंग मरीज की अपनी कोशिकाओं से विकसित होने केी वजह से शरीर द्वारा स्वीकार किए जाने की ज्यादा संभावना रहेगी ।

 

 

 

 

 

Image from internet.

 

 

रेत के कण ( कविता ) #LessonOfLife


Indian Bloggers

क्या रेत के कणों को देख कर क्या

यह समझ आता है कि कभी ये

किसी पर्वत की चोटी पर तने अकडे

महा भीमकाय चट्टान होंगे
या कभी

किसी विशाल चट्टान को देख कर मन

में यह ख्याल आता है कि समय की

मार इसे चूर-चूर कर रेत बना देगी?

नहीं न?

इतना अहंकार भी किस काम का?

तने रहो, खड़े रहो पर विनम्रता से।

क्योंकि यही जीवन चक्र है।

जो कभी शीर्ष पर ले जाता है और

अगले पल धूल-धूसरित कर देता है।

शब्दार्थ- Word meaning

रेत -Sand

कण-Particles

पर्वत की चोटी – the top of the mountain

भीमकाय चट्टान – giant rock

चूर-चूर – Shattered

अहंकार – narcissism , Ego, high-and-mighty

विनम्रता- politeness, humbleness

जीवन चक्र- Life Cycle

शीर्ष – Top

What is the best lesson that life has taught you so far? #LessonOfLife

Source: रेत के कण ( कविता )

जो गिनती में नहीं हैं-कविता

Pune civic polls: At 56, she waits to walk with pride, sporting blue ink on finger
Namira Shaikh, along with 43 other sex workers, will receive their voter identity cards on January 25, National Voters’ Day. ( News -The Indian Express ,PUNENewsLine Tuesday January  24, 2017)


IndiChange - Harnessing the collective power of blogging to fight evil.

उनका क्या जो गिनती में नहीं  हैं,

पुत्री, पत्नी या वधु नहीं मात्र नगरवधु है।

पण्यै: क्रोता स्त्री ( रुपया देकर आत्मतुष्टि के लिए खरीदी गई नारी),

वेश्या, गणिका, वारवधू, लोकांगना, नर्तकी कह

शतकों से प्रेयशी – रक्षिता बन ,

मन बहलाती रही।

उस का  प्रवेश निषिद्ध क्यों सभ्य समाज में ?

जीवन-मृत्यु में उसकी गिनती  हीं नहीं।

चलो, उन्हें गिनने का, ऊपर   उठाने का विचार तो आया।

शब्दार्थ – word meaning

वेश्या, गणिका, वारवधू, लोकांगना,रक्षिता,नगरवधू, पण्यै: क्रोता स्त्री- रुपया देकर आत्मतुष्टि के लिए खरीदी गई नारी -Prostitute.

शतकों –  Centuries.

प्रवेश निषिद्ध -No entery.

सभ्य समाज -Civilised society.

Image courtesy – internet.

ऐसा क्यों?  (जिंदगी के रंग 12 -कविता) 

ऐसा क्योंहोता है?

एक आवाज़ आई –
यह तो मौका है लोगों को पहचानने का.

साथ तो वही देगा ,

जो खुद सच्चा  हो.

जिन्हों ने  खुद गलतियाँ की है

वे  तो हमेशा गलत तरफ़ ही खड़े मिलेंगे ना ?

कितने लोग साथ है यह मत देखो.

कौन  है यह देखो.

क्योंकि वही  अपने है.

वही सच्चे है…..

धुंध- जिंदगी के रंग- 11(कविता) A Tributes -poetry

Etah road accident: School bus collides with truck killing over 20 school kids, dozens injured.( 19th January, 2017)

palash

राह चलते-चलते ,

सामने धुंध छा गया।

धुंधली राह में ङगर खो गया।

हँसते- खिलखिलाते नन्हें-मुन्ने भी

खो गये कोहरे की चादर में।

रह गये बिखरे नन्हें जूते, किताबें, स्कूल बैग…….

जाते हुए शिशिर अौर

आते हुए वसन्त ने पलाशों को खिला दिया।

जैसे ‘जंगल में आग’ लगा दिया।

पर ये फूल से नन्हें-मुन्ने  समय से पहले मुरझा क्यों गये?

आग बनने से पहले, राख में खो गये।

रह गये ‘टेसू के आग’ से टीस दिलों में………

शब्दार्थ- Word meaning

जंगल की आग,टेसू, पलाश – flower known as flame-of-the-forest, bastard teak.

शिशिर -Winter Season

वसन्त – Spring Season

टीस – twinge, suffering, pain, misery, ache.

Images from Internet.