नाम में क्या रखा है ? What is in a name?

जब, मेरी बेटी छोटी थी। तब मैं उसके साथ अक्सर एक खेल खेला करती थी ।

उसे अलग अलग नाम से बुलाती थी और फिर उससे उसका नाम पूछती थी।

उसे इस खेल में बङा मजा आता था। उसके चेहरे पर बिखरी उसकी खुशी और

खिलखिला कर नए -नए नाम बताने का खेल मुझे बड़ा अच्छा लगता था 

 यह खेल बहुत बार उल्टा भी चलता  था।  यह  मैं अक्सर तब करती थी,

जब मेरे पास बहुत काम होता था। जब मैं बहुत व्यस्त होती थी और वह

मुझे कुछ ना कुछ बोल कर परेशान करती रहती थी। मतलब यह कि  मैं

तब  उसे व्यस्त रखने के लिए  ऐसा करती थी।

 शायद, दुनिया में हर व्यक्ति के लिए  अपना नाम ही सबसे प्यारा शब्द  होता है।

पर  लड़कियों के  नाम शादी के बाद  बदल जाते हैं। लड़कियां अपने नाम या सरनेम के

साथ हीं  जिंदगी क्यों नहीं चला सकती हैं?

39 thoughts on “नाम में क्या रखा है ? What is in a name?

    1. यह बात आप जैसे कुछ ही लोग सही मानते है. अब ज़रा सोचिये अगर कभी आपको अपना नाम या सरनेम बदलना पड़े तब ?

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      1. सुना था समाचारों में , कि हरियाणा में कहीं पर घर के बहार नेम प्लेट पर बेटियों का नाम रखा गया है

        अगर यही ससुराल में हो तो ( पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता वाले ) तो आत्मदाह कर लेंगे ?😊

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  1. ऐसा हो सकता है और ऐसा होता भी है.. लड़कियों को अपना नाम या कुलनाम बदलना अनिवार्य नहीं.. जरुरत है तो एक समझदार जीवन साथी की।

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    1. हाँ , यह बात तो ठीक है. पर मै इस प्रचलन की बात कर रहीं हूँ. अपनी पुरानी कुछ friends को fb पर पहचाने में समय लगा क्योंकि सरनेम बदला हुआ था.

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      1. जी.. हम लोगों को भेड़ चाल चलने की आदत है.. इसलिए भी कुछ लोग बदलाव का हिस्सा नहीं बनते.. पर्सनली मुझे तो ये सरनेम का कांसेप्ट ही बुरा लगता है .. बाकी जो जैसे खुश रहे.. मगर खुश रहें 😊

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      2. यह कॉन्सेप्ट भी पुराना है और सरनेम बदलने की प्रथा भी. आपकी बातें अच्छी लगी. 😊😊

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  2. Sochne wala vishay hai… Or gambheerta se iska saar nikalna ho to shuruaat se suruaat krni hogi… Kyuki jisne bhi is concept ko banaya hai kuch na kuch soch kr hi to bnaya hoga shaayad us samay iski jarurt ho…..
    Pehle parda pratha jaisi bahutsi paramparae rahi jinhe peedi dar peedi badaya gaya.. Jabki uski koi jarurt hi nhi thee lekin aaj ke samay mai naari shakti ka bolbala hai…. Sarkar ho ya samaj samay mai peeche dekhne par lgta h ki aaj ke yug mai kaafi badlaaw hai… Reeti riwaj samay ke saath badal rahe hain… Soch bhi samay ke saath badalti jaa rhi hai… Shayad islie kyuki ye jaruri bhi hai or iske vikalp mai kuch rkha jaa skta hai.
    Lekin baat kare surname badalne ki to agar hum isko bhi badalna chaahe to jarurat hogi iske dusre vikalp ki… Ki iski jagah kon lega… Ya surame hatane par kya logo ko seedhe tor par pehchan krne mai kathinai na ho…
    Ya mahilaae apna surname naa badle to kya hone wali santaan konsa surname rakhegi pita ka ya maata ka… Aise bahut se sawal hai jinke jawab mai hi badlaw aaega jis din aise bahut se sawalo ke jawab mil gae to badlaaw bhi aaega or samaj mai isthirta bhi kaayam rahegi

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  3. बचपन ही एक ऐसा वक्त होता है जिसके हर पल हम सभी को याद होते है ..
    बहुत ही सुंदर यादो के साथ सुंदर पोस्ट
    अच्छा लगा रेखा जी

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    1. बचपन के सुनहरे दिन सभी को याद करना अच्छा लगता हैं। लेकिन इसमें एक विरोधाभासी बात भी है। जब हम बच्चे होते हैं तब बड़े होने की इच्छा होती है और जब बड़े होते हैं तो बचपन के दिन याद आते हैं। इसे पसंद करने के लिए बहुत शुक्रिया।

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