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उपहार – मेरे जीवन की सच्ची रहस्यमय घटना, The Gift – a mysterious story

            बात वर्षो पुरानी है।  हमारे   पड़ोस के परिवार से हमारे बहुत अच्छे संबंध थे। उनका युवा पुत्र  हम लोगों से बहुत हिलामिला हुआ था। उसकी मां अक्सर कहा करती थे, वह किसी की बात माने ना माने आपकी हर बात मानता है। इसलिए अक्सर उस के किसी बात से परेशान होने पर उसकी माँ उसे मेरे पास भेज देती और मेरा काम होता उसे समझाना । अौर सचमुच वह कभी मेरी बात टालता नहीं था। अगर उसे मेरी किसी परेशानी का पता चलता, तुरन्त मदद के लिये पहुँच जाता।

           एक बार उसकी माँ ने मुझसे कहा कि वह पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहा है । इसलिए पास आते परीक्षा के लिए अच्छे से तैयारी करने के लिए मैं उसे समझाऊं। एक दिन मैंने उसे अपने पास बैठाकर,  उससे बस इतना कहा – “अगर तुम इस परीक्षा में अच्छे नंबर लाअोगे, तब  मेरी ओर से तुम्हारे लिए तुम्हारा मनपसंद उपहार पक्का रहेगा।” अचानक मैंने देखा उसकी  आँखे आँसू भरी थी। मुझे कुछ कारण समझ नहीं आया। पर  मैंने आगे कुछ कहना ठीक नहीं समझा। इसके कुछ समय बाद हम लोग दूसरे शहर में शिफ्ट कर गए। 

           ***

 एक रात मैंने एक अजीब सा सपना देखा। एक बड़े से छत पर  लंबा चौड़ा आयोजन चल रहा था। वहाँ पर काफी लोग थे। मैंने देखा  छत के दूसरे हिस्से पर, दूर  वह  बैठा था।  मैंने उसे देखा। मुझे पूरा विश्वास था कि हमेशा की तरह वह खुद ही भागता दौड़ता मेरे पास आएगा और अपनी ढेरों बातें सुनाना शुरू कर देगा। पर  वह अपनी जगह से  नहीं उठा।  थोड़ी देर के बाद मैं उसके पास गई और बातें करने लगी। उसने मुझसे कहा -“मुझे  तुम्हारे पास आने का बहुत मन था।”  मैंने पूछा – “फिर आए क्यों नहीं?” उसने  पूछा – “तुम्हें मालूम नहीं क्या हुआ है मेरे साथ?  मेरे पैरों में बहुत चोट  है, बहुत दर्द है। मैं चल नहीं पा रहा हूं अौर तैर भी नहीं पा रहा हूं इसलिए तो नहीं आया।” उसकी बातें अजीब अौर अटपटी लगी । पर यह तो सपना था ।

             

 कुछ समय बाद अचानक खबर मिली कि उसने अपने घर के सामने के कुएं में कूद कर आत्महत्या कर ली। कारण पता नहीं चल सका। मैं हैरान थी। इतना खुशमिजाज, जिंदादिल लङका आत्महत्या कैसे कर सकता है?  मैं बहुत समय तक विषाद-ग्रस्त  अौर उदास रही । काफी समय के बाद मुझे उसकी मां से मिलने का मौका मिला।

उसकी मां ने बताया कि वह मरने से पहले मेरे पास आने के लिए अक्सर अपने घर में जिद किया करता था और उसकी मृत्यु आत्महत्या नहीं थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल रहा कि किसी ने उसकी पैरों में बहुत बुरी तरह मारा था। उसके बाद उसे कुएं में डाल दिया था और वह शायद तैर कर निकल भी नहीं सका होगा। उसकी मां ने रोते-रोते यह सारी कहानी सुनाई और मैं हतप्रभ चुपचाप, आँसू भरी आँखों से उनकी बातें  सुनती रही।

मैं उन से यह कह भी  नहीं  सकी कि उसने अपनी मृत्यु की रात हीं मुझे यह सब बातें  मेरे सपने में आकर बताया था। पता नहीं इसे क्या कहेगें?  मेरा वहम ….सच्चाई…. सपना…. रहस्य ….  टेलीपैथी….. कुछ और……पर मेरे लिये कभी ना भूलने वाला दुखद सपना बन गया। वह क्यों आया था मेरे पास? अपना उपहार लेने या मुझ से मिलने? 

Image courtesy internet.

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Author:

I am PhD. in Psychology, a PGDM in HR, hold a certificate in Child Guidance and Counsel ling and a writer, not necessarily in that order. My work experience includes teaching MBA students in Usha Martin and Amity Colleges in Patna and teaching Psychology in various college of Patna to B.A. and M.A. students and to law students in Swami Vivekanand law College in Lucknow. I've also taught primary school students in DPS, Dhanbad. I got married at the age of 19, in my first year of BA Psychology Hons. I finished my studies and developed my interest in women and children studies in India. My thesis is about the urban, educated Indian women. I have written Hindi articles for Hindustan, Dhanbad and the MA Psychology study course for Nalanda Open University in Patna. My interest in writing is something that happened subconsciously. But lately, after having written deep, psychological and spiritual articles and having produced books for Post Graduate Psychology students, I realized how much I love writing for children. I find it refreshing and heartening to write about their innocence, faith, fears and fearlessness. My two daughters have grown on a staple diet of magic and fairy tales and I must confess that I have enjoyed their childhood perhaps more than they did themselves. I wish to keep writing for these little people who are the bright future of our country, our civilization and our world.

53 thoughts on “उपहार – मेरे जीवन की सच्ची रहस्यमय घटना, The Gift – a mysterious story

      1. I totally agree with you Sumit, यह बात मैंने अपनी जिंदगी में दो बार महसूस किया है कि अगर किसी की आंखों में दुख क्या तकलीफ दिखे तो मदद के लिए हाथ जरूर बढ़ाना चाहिए वर्ना मन मे guilt रह जाता है।

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      2. Bahut sahi. Aur ye guilt hume andar hee andar Marta hain.

        Wese it was not your fault that you used to give love to that boy, he must have had gone through something. 😊😊

        I’m so glad that you shared it with us. Be always happy Rekha. 😊😊

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      3. Thanks for your nice words. हाँ , उसके मन में कुछ परेशानियां ज़रूर होंगी जो वह किसी से कह नही सका होगा.
        इस घटना को लिख देने से मेरा मन कुछ हलका हो गया.

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      1. होता है ऐसा.. कुछ तो समय के पार से रिश्ते बनते हुए आते हैं.. बस हम समझ नहीं पाते

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  1. Everyday we walk,we eat ,we work,we sleep and we know we know everything about what we are doing and how it’s being done. But to the irony,we aren’t right..we live in the real world of illusions and mysterious energies… It intrigues us,whenever we sometimes get to feel its frequency…
    You should not be sad.,coz everyone doesn’t feel that out of the world thing…May god Rest him in peace🙏

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    1. Yes Preeti, generally we believe that relationships n feelings are reciprocal. But sometimes we do not have an idea about how others are feeling for us. It may be positive or negative.
      Realising it in such a situation really hurts.

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    1. हाँ कुछ राज़ , बस रहस्य ही रहते है. दरअसल इस पर लिखी मेरी कविता पर बहुत से प्रश्न आये. किसी ने यहाँ तक कहा की यह कविता अधूरी सी लगती है. शायद मैं कुछ कहते कहते रुक गई हूँ. इसलिये मैंने इसे लिखा.

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  2. Rekha ji aapki likhi aapbeeti ofdil ko ek tees si de gayi koi baat nhi agar banda beete huye hr lmho ko hamesha yaad krke dukhi hota he to mrne wale ki aatma ko bhi jyada takleef hoti he. meri baat ka apko bura to nhi laga sorry .

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  3. Oh god, I learnt something, whatever you want to do, just do it. You never know what tomorrow brings. Moreover, these special relationships are meant to have special bonds, kind of heart to heart contact.
    More powers to you and his family. May his soul, rest in peace.

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      1. मेरी माँ भी कई बार, इस तरह की बात और अनुभव साझा करती हैं।
        स्पेशलली हमारे यहाँ भोर के सपने का बहुत महत्व और वास्तविकता हैं।
        हमलोग के बीमार होने पर, बिना बताये अनुभव कर लेती हैं।
        परंतु ये सब होता कैसे हैं..?

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