जिंदगी के रंग- कविता 15

News PUNENewsline , Tuesday, MARCH 7, 2017

SSC Exam, Fearing paper leak cases,

 

फिसलते हुए वक्त को रोकना बस में नहीं है

जितना पकड़ो,

रेत की तरह मुट्ठी से रिस जाता है

बस बदलता ही रहता है  यह वक्त,

जिंदगी के  नये नये  परीक्षाअों  के साथ।

कितना भी पूछ लो पंडित नजूमियों से आगे क्या होगा???

कोई जवाब नहीं मिलता,

वक्त अौर जिंदगी में आगे क्या होगा ?

पर यह इंसान भी क्या चीज है,

खुद ही परीक्षा लेता है अौर

अक्सर  परीक्षा के पर्चे, परीक्षा से पहले

चंद सिक्कों के लिये  बेच दिया करता  हैं…………

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61 thoughts on “जिंदगी के रंग- कविता 15

    1. बताइए तो भला, यह भी कोई बात हुई ? ऐसे परीक्षा का क्या फायदा है? बच्चे बेचारे भी कुछ सीखेंगे नहीं और आत्मविश्वास भी नहीं होगा उन्हें।

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    1. अगर इन समस्याओं से निपटा नहीं जा सकता है, तो अच्छा होगा एग्जाम का सिस्टम ही बदल देना चाहिए, और कुछ नई व्यवस्था लागु की जानी चाहिये।

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      1. हाँ आपकी बात बिल्कुल सही है। पर सोचिए उन बच्चों के बारे में जो पढ़ने के बाद भी कॉन्फिडेंट नहीं होते हैं।

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      2. हां आपकी बात बिल्कुल सही है। पर सोचिए उन बच्चों के बारे में जो पढ़ने के बाद भी कॉन्फिडेंट नहीं होते हैं।

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      1. हां, दिल को दुखी करने वाला अक्सर का न्यूज़। जिंदगी की परीक्षा में बेचारे क्या करेंगे? क्या कोई सोचता भी नहीं कि उन्हें आगे का प्रश्न कौन उन्हें बताएगा?

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      2. yes the system is very corrupt but student is also responsible. If the students did not give exams through cheating and works hard for exam then slightly improvement in the system. Students is also responsible for this corrupt system

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