ज़माने का दौर – कविता

News – Blast at Chinese kindergarten was a bomb attack

  Nursery blast kills seven in China’s Xuzhou

हमारे स्कूल पर बम गिरते हुए …..
क्या उनके जेहन में एक बार भी, 
अपने घरों, बच्चों का ख़याल आया था ?

लोग इतने क्रूर क्यों है ?
हमने उनका क्या बिगाडा था ?
हम इस कठोर दुनिया के लिये नहीँ बने ……

इसलिये दुनिया से विदा हो गये ।
पर , इतने बड़े  अपराध बोध के साथ ……
क्या ऐसे लोग चैन से जी सकेगें ??

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“ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहे हैं, अगर आप उससे वाकिफ़ नहीं हैं तो मेरे अफसाने पढ़िये और अगर आप इन अफसानों को बरदाश्त नहीं कर सकते तो इसका मतलब है कि ज़माना नाक़ाबिले-बरदाश्त है। मेरी तहरीर(लेखन) में कोई नुक़्स नहीं । जिस नुक़्स को मेरे नाम से मनसूब किया जाता है, वह दरअसल मौजूदा निज़ाम का एक नुक़्स है। मैं हंगामा-पसन्द नहीं हूं और लोगों के ख्यालात में हैज़ान पैदा करना नहीं चाहता। मैं तहज़ीब, तमद्दुन, और सोसाइटी की चोली क्या उतारुंगा, जो है ही नंगी। मैं उसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नहीं करता, क्योंकि यह मेरा काम नहीं, दर्ज़ियों का काम है ।”
― Saadat Hasan Manto

Nature

Jyoti

The calm trees

The sleeping grass

The chirping birds

The musical winds

The magnetic paths

The dancing river

The eyes can’t get better

View than this.

The mind can’t get nothing

More peaceful than this.

The soul can’t get more

Freedom than this.

The brain can’t meditate

Better than this.

~Jyoti  Yadav

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आँसू अौर मुस्कान

 

कुछ हँस कर, कुछ रो कर झेलते हैं।

 दुःख सहने का अपना- अपना तरीका होता है।

क्या अच्छा हो, गर आँखों में आँसू  पर  होंठों पर मुस्कान हो।

 

 

Image from internet.