Posted in हिंदी कविता

भरोसा अौर फरेब – कविता

धोखा- फरेब की परिभाषा खोजने पर,

जवाब मिला, दूर जाने की क्या जरुरत है?

यह तो अक्सर पास वालों से मिलता है।

खरीदने की भी जरुरत नहीं, मुफ्त बँटता रहता है,

बस थोङा भरोसा कर के तो देखो….

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Author:

I am PhD. in Psychology, a PGDM in HR, hold a certificate in Child Guidance and Counsel ling and a writer, not necessarily in that order. My work experience includes teaching MBA students in Usha Martin and Amity Colleges in Patna and teaching Psychology in various college of Patna to B.A. and M.A. students and to law students in Swami Vivekanand law College in Lucknow. I've also taught primary school students in DPS, Dhanbad. I got married at the age of 19, in my first year of BA Psychology Hons. I finished my studies and developed my interest in women and children studies in India. My thesis is about the urban, educated Indian women. I have written Hindi articles for Hindustan, Dhanbad and the MA Psychology study course for Nalanda Open University in Patna. My interest in writing is something that happened subconsciously. But lately, after having written deep, psychological and spiritual articles and having produced books for Post Graduate Psychology students, I realized how much I love writing for children. I find it refreshing and heartening to write about their innocence, faith, fears and fearlessness. My two daughters have grown on a staple diet of magic and fairy tales and I must confess that I have enjoyed their childhood perhaps more than they did themselves. I wish to keep writing for these little people who are the bright future of our country, our civilization and our world.

32 thoughts on “भरोसा अौर फरेब – कविता

  1. दिल के टूटने के भी अंदाज अनोखे है…टूटता असल में कुछ भी नहीं….मगर फिर भी बिखर जाती हर चीज़ है……
    Very nice post….👌👌👍👍

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    1. 🙂 टूटता दरअसल ऐतबार अौर विश्वास है। खास कर उनका जिन्हें भरोसा करने की आदत होती है, अौर बिखरती हैं जिन्दगी।
      बहुत शुक्रिया।

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  2. भरोशा शब्द शायद आज के वक़्त में मजाक लगता है ….! भरोसा किस चिड़ियाँ का नाम है , और ये कहाँ मिलती है …….शायद मैं इसकी खोज में हूँ…. शायद मिल जाये

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    1. बात तो सही है. दुनिया के धोखे देख कर ऐसा ही लगता है . पर भरोसे पर दुनिया कायम है. 😊😊

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      1. नही ….मुझे ऐसा नही लगता । प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे को ठगने के फिराक में रहता है।
        और जो दूसरों को सम्मान करता है लोग उसे बेबकुफ़ समझते है और हमेशा उनका फायदा उठाते है।

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      2. हो सकता है आप सही है पर मेरे साथ आजतक ऐसा नही हुआ। जिस पर ज्यादा विस्वास था वो धोका देने में सबसे आगे निकला। अपने -पराये तभी तक है जब तक आप खुश हो बुरे वक्त में सब धोके ही देते है।

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  3. आप की बात शत प्रतिशत सही है. जितना विश्वास किया उतने ही धोखे मिले . पर आदत है लोगों पर भरोसा करने की.
    सब लोग दूसरों को ठगते है , यह ज़रूरी नहीँ. कुछ तो हमारी तरह विश्वास करे की आदत भी रखते होने.

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  4. हाँ …..ये तो बात है , आखिर कुछ अच्छे लोगो की वजह से ही दुनिया टिकी हुई है । तभी तो लोग धोखे खाने के बाद भी उम्मीद नही छोडते है , सोचते है अब अच्छा होगा

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    1. अच्छे का तो मुझे नहीँ पता , पर धोखा देने बालो के साथ साथ धोखा खाने वाले भी तो होने चहिये. 😊😊

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      1. लेकिन ऐसा नही होता है ….मै तो इंतिजार कर रहा हूँ जो अभी मेरी परेशानी पर comment करते है और सुनाने की कोसिस करते है उनके साथ मेरे जैसा ना हो ,लेकिन उनको सबक जरूर मिले

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  5. कहना आसान है लेकिन खुद पर जब कभी बीतता है तब एहसास होता है कि जब आपका अपना कोई इस दुनिया से चला गया और उस वक़्त आपकी मदद ना कर के उपदेश दे या commet करे तो उस वक़्त जो बाते चुभती है उसकी पीड़ा सहने लायक नही होती।

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    1. आप की बातों से मैं पूरी तरह सहमत हूँ। लेकिन लोगों का क्या ? उनका काम है कहना।
      कुछ पंक्तियाँ post करने के लिये लिखी थी पर अभी तक ब्लॉग पर ङालीं नहीं है –

      सुनने वाले के लिये जो सिर्फ कहानियाँ हैं,
      उनमें कितनी अौर कहानियाँ,
      आँसू अौ मुस्कान छुपे हैं,
      सुनाने वाला हीं जान सकता है।

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      1. और पहला लाइक मेरी तरफ से ही रहेगा क्योंकि ये कविता मुझे बहुत पसंद आई है

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