जिंदगी के रंग -47

चाहो जरुर अपने आप को ।

पर इतना भी ना चाहो कि

किसी अौर को चाहने की

जगह हीं ना रहे दिल में।

अौर

चाहो जरुर दूसरों को ।

पर इतना भी ना चाहो कि

खुद को चाहने की जगह ही ना रहे दिल में।

 

कविता की अंतिम तीन   पंक्तियाँ   सआभार ब्लॉगर मित्र  अभय  के सौजन्य से ।

31 thoughts on “जिंदगी के रंग -47

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  2. And Conversely
    चाहो जरुर दूसरों को । पर इतना भी ना चाहो कि खुद को चाहने की जगह ही ना रहे दिल में। 😛 😀

    Liked by 3 people

    1. आपकी लिखी पंक्तिँयो मुझे बङी अच्छी लगी । उन्हें मैंने कविता में जोङ दिया है। आशा है आप अन्यथा नहीं लेगें।

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      1. कोई बात नहीं, ये आप ही की रचना से प्रभावित था, बस मेरे नाम को अभय ही रहने दिजिये 😉

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      2. धन्यवाद अभय ! भूल सुधार के लिये भी 🙂 । मैं अक्सर ऐसी गलतियाँ करती रहती हूँ।

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      3. बहुत बार जब कभी अपने पुराने post में मैं अपनी गलती देखती हूँ तब वास्तव में मैं चाहती हूँ कि ऐसी गलतियाँ लोग जरुर बतायें।
        कुछ mistakes auto correction से होता है अौर कुछ ध्यान नहीं देने से। 🙂

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