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जिंदगी के रंग – 52

अपने अंदर की आग हीं

मोमबत्ती को

जलाती

गलाती और

रूलाती है .

पर जलते हुए यह राह रोशन कर जाती है .

आँसू अश्रु या अश्क

पतझड़ के नग्न होते पेड़ों से

आँसू से गिरते तरु पत्र .

निशा के चाँद के ओस अश्रु

या

उसके नयनों से टपकते अश्कों में …

किस में ज्यादा दर्द छुपा था

पता नहीं .

टूटना और बिछुड़ना तो प्रकृति का नियम है .