Posted in चंद पंक्तियाँ, hindi poem

अँधेरा

समय  चक्र चलता रहता है,

अँधेरा …. अौर फिर उजाला….

कहते हैं –

अँधेरे को उजाला हराता है।

पर अक्सर लगता है –

रात के अँधेरे अनोखे….  अद्भुत…… विचार देते हैं।

शायद

मौन अंधेरा आँखों

की ताकत भी दिलो दिमाग में भर देता है।

शायद

स्वयं को देखने अौर आत्म मंथन

के हालात बना नवल -नये विचारों को जगाता है।

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Uniqueness…

lifebeyondimagination16

“You need not search for uniqueness, you are unique already. There is no way to make a thing more unique. The words “more unique” are absurd. It is just like the word “circle.” Circles exist; there is no such thing as “more circular.” That is absurd. A circle is always perfect, “more” is not needed.”

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