Funding for great barrier reef restoration and protection

Advertisements

धूप मायूस लौट जाती है….

ग़ज़ल: बशीर बद्र

खुद को इतना भी मत बचाया कर,

बारिशें हो तो भीग जाया कर.

चाँद लाकर कोई नहीं देगा,

अपने चेहरे से जगमगाया कर.

दर्द हीरा है, दर्द मोती है,

दर्द आँखों से मत बहाया कर.

काम ले कुछ हसीन होंठो से,

बातों-बातों में मुस्कुराया कर.

धूप मायूस लौट जाती है,

छत पे किसी बहाने आया कर.

कौन कहता है दिल मिलाने को,

कम-से-कम हाथ तो मिलाया कर.

वर्षा की बूँदे

वर्षा की चंद बूँदों ने

सतरंगा इंद्रधनुष……

सोन्धी सी ख़ुशबू फैला

तन मन को गीला कर दिया .

काग़ज़ पर बारिश को बूँदों

को उतारने …..लिखने की कोशिश की.

पर लिखने का मज़ा तब है जब

पढ़ने वाले का मन उस में भीग जाए .

और दिल कोई गीत गुनगुनाये.

No face is more beautiful than yours!

You suppose you are the trouble.

But you are the cure.

You suppose that you are the lock on the door.

But you are the key that opens it.

It’s too bad that you want to be someone else.

You don’t see your own face, your own beauty…..

no face is more

beautiful than yours.

❤️❤️ Rumi