ज़िंदगी के रंग -59

यह दुनिया निराली है .

राग -रंग, माया- मिथ्या

के बीच ,

कभी लगता है , सभी अपने है .

चारो ओर मेले ही मेले है .

कभी लगता है –

इस भरी दुनिया में तनहा है .

सब अकेले ही अकेले है .