ज़िंदगी के रंग – 63

पलक झपकते कभी कभी

कितना कुछ बदल जाता है .

कभी मन आँखों के रास्ते

बरस जाता है.

कभी आसमान के आँसू

बरसात बन बरस जाते है.

इन्हें पन्ने पर उतारने की कोशिश …..

शब्दों में बाँधने की हर कोशिश

बहा ले जाती है ये बरसाती बूँदे……

ज़िंदगी के रंग -62

समंदर ने पैरों के पास

अपने झागो के साथ

कुछ सीपियाँ ऐसे

ला कर

छोड़ गया ,

जैसे कुछ लौटा रहा है.

ज़िंदगी भी अक्सर बड़ी मासूमियत से

बहुत कुछ अचानक लौटा देती है.

ठीक ही कहते है ,

जो दो वह लौट कर ज़रूर आता है .