अपने लिए खड़े होना

कहते है –

जीत कर, फिर से हार जाना..

यही तो रवायत है, रिश्ता निभाने की…

पर जब किसी को सिर्फ़ जीतने की

आदत हो जाए .

झुकना नहीं सिर्फ़ झुकाना

ही नियम बन जाय……..

तब ?????

हारते और झुकते रहने

से अच्छा है –

अपने लिए खड़े होना सीखना ……