वर्षा की बूँदे

वर्षा की चंद बूँदों ने

सतरंगा इंद्रधनुष……

सोन्धी सी ख़ुशबू फैला

तन मन को गीला कर दिया .

काग़ज़ पर बारिश को बूँदों

को उतारने …..लिखने की कोशिश की.

पर लिखने का मज़ा तब है जब

पढ़ने वाले का मन उस में भीग जाए .

और दिल कोई गीत गुनगुनाये.

6 thoughts on “वर्षा की बूँदे

  1. मिट्टी की सौंधी महक बारिश का हाल कह जाती है —-कागज पर पड़े शब्द भी पढ़नेवालों को सोचने पर बिबस कर जाती है।

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