सागर और दुनिया

सागर वही है ….एक ही है सबके लिए .

कोई मोती , कोई मत्स्य और

कोई सीपियाँ चुन लाता है .

किसी को नमकीन …खारा दिखता है ,

किसी को अमृत और लक्ष्मी का

जन्म दाता दिखता है.

ऐसी हीं यह दुनिया है .

यहाँ जो जैसा चाहता है ,

वैसा हीं पाता है .

विपत्ति के मित्र

तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक|

साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक ||

तुलसीदास जी कहते हैं, किसी विपत्ति के समय आपको ये सात गुण बचायेंगे–

आपका ज्ञान या शिक्षा,

आपकी विनम्रता,

आपकी बुद्धि,

आपके भीतर का साहस,

आपके अच्छे कर्म,

सच बोलने की आदत

और ईश्वर में विश्वास .

अनकहे अल्फ़ाज़

बोलतीं आँखे,

लरजते लब,

हथेलियाँ आपस में फँसी,

बेचैन अंगुलियाँ,

ज़मीन खुरचते पैर के अँगूठे,

बहुत कुछ कहते है …….

फिर भी अनकहे अल्फ़ाजों

को सुनना ज़रूरी क्यों है?