“ना “

दिली आभार उनका जिन्होंने जरुरत के समय

मदद के लिये हाथ बढ़ाया ।

पर उनका भी शुक्रिया

जिन्हों ने “ना” कहा।

हर “ना” ने खङा होना सिखाया।

कितनों का सच्चा रूप दिखाया ।

जरुरतमंद के लिये हाथ बढ़ाने का मोल समझ आया।

अौर

दिल ने कहा- “ना”  वालों की

ज़िम्मेदारियोँ  से तुम आज़ाद हो।

उनके लिये  चिंतन करने के 

दायित्व से मुक्त हो !!! 

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