शक

जिजीविषा

मुझे शक है कि भूलने लगा हूँ खुद ही को मैं,

शर्त लेकिन ये थी कि मुझे बहुत कुछ याद रखना है।

View original post

जिंदगी के रंग -67

साँसे चले …समय गुजरता रहे बस …..

क्या यही है ज़िंदगी?

ना मक़सद …. ना ख़्वाब ……

हसीन तोहफ़ा है यह ज़िंदगी.

थोड़ी तमन्ना, अभिलाषा, लालसा

 लक्ष्य…. मकसद मिला कर 

गुनगुनाइये…..

राहें खुलती जायेंगीं।