शैङो सेल्फ

 

शैङो सेल्फ – शैङो सेल्फ  किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व का  अज्ञात, अंधकारमय  पक्ष  है। कुछ बातें हमारा मन  नहीं चाहता है कि हम में  हो ( जैसे -आदिम व्यवहार, नकारात्मकता, सामाजिक या धार्मिक रूप से अमानवीय भावनाएँ और यौन वासनाएँ,  स्वार्थपन, लालच, ईर्ष्या, क्रोध जैसे आवेग), लेकिन हमारे मन का   एक हिस्सा डरता है या   हम सभी को अक्सर लगता है कि हममें  ऐसी बुराईयाँ हैं।  संक्षेप में, शैङो सेल्फ व्यक्तित्व का “अंधेरा पक्ष” है। जो कुछ भी हमें बुरा अौर अस्वीकार्य लगता हैं, और खुद में होने से ङरते हैं वह शैङो सेल्फ का हिस्सा बन जा सकता है।

अपने इस व्यवहार को  समझना उपयोगी  है क्योंकि शैङो सेल्फ  के कारण  हम सभी बहुत से रक्षात्मक या ङीफेनसिव व्यवहार ( अपने को बचाने की कोशिश)  करते हैं। जुंग के अनुसार, शैङो सेल्फ सामान्य अौर और तर्कहीन व्यवहार  है जो अक्सर सभी मैं होता है। इसकी वजह से हम बहुत सी बातों को गलत तरीके से व्यक्त ( मनोविज्ञान प्रक्षेपण)    करने लगते  है।  अपने आप को नैतिक रूप से कम आकंने ( व्यक्तिगत न्यूनता ) लगते हैं  अौर  हीनता के शिकार हो जाते हैं।

 

 

 

 

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Shadow self

 

The shadow self – The shadow is the unknown dark side of the personality.  It refers to the portion of our psyche that we want to know that we are not ( Ex-The primitive, negative, socially or religiously depreciated human emotions and impulses like sexual lust, power strivings, selfishness, greed, envy, anger ), but  a part of us fears that we  are. It may be positive or negative. In short, the shadow is the “dark side” of the personality.  Whatever we deem evil, inferior or unacceptable and deny in ourselves becomes part of the shadow.

 

Understanding one’s shadow can be helpful because there may be a lot of defensive behaviour  due to  shadow self. According to Jung, the shadow, in being instinctive and irrational, is prone to psychological projection, in which a perceived personal inferiority is recognized as a perceived moral deficiency .