जिंदगी जीना सीखा गए

कुछ गैर ऐसे मिले,

जो मुझे अपना बना गए।

कुछ अपने ऐसे निकले,

जो गैर का मतलब बता गए।

दोनो का शुक्रिया

दोनों जिंदगी जीना सीखा गए।

Unknown

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उम्र चाहे जो भी हो…..

उम्र चाहे जो भी हो मनचाहे रिश़्ते,

अपने आप हमउम्र हो जाते हैं।

Unknown

दिल ही तो है

दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त

दर्द से भर न आये क्यों

रोएंगे हम हज़ार बार

कोई हमें सताये क्यों…….

ग़ालिब

ज़िंदगी के रंग -71

कभी कभी समझ नहीं आती ,

क्यों है ज़िंदगी इतनी उलझन भरी ?

जितनी सुलझाओ उतनी

ही उलझती जाती है .

रंग बिरंगे उलझे धागों की तरह

कहीं गाँठे कहीं उलझने हीं उलझने

और टूटने का डर …..

क्या यही है ज़िंदगी ?