ज़िंदगी के रंग -79

एक बात ज़िंदगी ने बता दी .

जब आप सच और सिर्फ़ सच बोलते हैं.

गोया साफ़ बोलते हैं.

कम बोलते हैं,पर काम का बोलते है

और आपका काम बोलता है .

तब सारी दुनिया नाराज़गी दिखलाती है .

 

ये सदायें

बरसात में बिन बोए भी

कुकुरमुते निकल आते है,

वैसे ही जैसे बिन बुलाए बरस जाते है बादल .

पहाड़ों में दी आवाज़ें भी गूँज बन

लौट आती है वापस.

फिर क्यों कभी – कभी ,

किसी किसी को बुलाने पर भी

जवाब नहीं आता ?

कहाँ खो जाती है?

ये सदाये…… ये पुकार …… ये लोग ?

ख़ुद को

हम कई बार खुद को

बिसार देते हैं।

खुद का ख्याल रखना भूल जाते हैं,

अपनों  के लिए अपने-आप को सहेजना है जरुरी।

स्पष्ट सुलझे दिलो-दिमाग अौ मन के लिये

टूट कर बिखरने से खुद को खुद से है संभालना है जरुरी।