थकान

कभी कभी ज़िंदगी

से थकान होने लगती है .

चाहो कुछ

होता कुछ और है

.ना जाने किस मुक़ाम पर

क्या रंग दिखाएगी ?

कब हँसाएगी कब रुलाएगी ?

2 thoughts on “थकान

  1. सुन्दर प्रस्तुति ! जीवन में प्रायः थकान एकरसता के कारण आती है , ऐसा मेरा मानना है | इसलिए :

    ये बहुत अच्छा है
    जिंदगी बताती नहीं
    कि उसका इरादा क्या है
    वर्ना फीका सा हो जाता
    ज़िन्दगी का सफर
    बेरंग सुनसान सी लगती
    जीवन की डगर !
    ऊँची नीची रेखाएँ दर्शाती
    जीवन है कायम, है गतिमान
    सीधी सपाट रेखा बताती
    बस, आगया इहिकाल |

    Liked by 1 person

    1. धन्यवाद !
      बहुत सुंदर रचना .
      मेरे विचार से थकान , जीवन पथ पर कुछ मौक़ापरस्त और स्वार्थी लोगों के व्यवहार से भी आती है .

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