फटे यथार्थ के टुकडे

चोट खाया मर्म,

कुछ कड़वे रिश्ते

तीखी यादें अतीत के शून्य

में कहीं विलीन हो जातें है .

उन्हें चिर निद्रा में डूबा रहने देना ही ठीक है .

वापस खिंचने की कोशिश में हाथ आते है मात्र फटे यथार्थ के टुकडे

 

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