ज़िंदगी के रंग -78

ज़िंदगी को देखने का नज़रिया

सबका अलग-अलग होता है .

हम सही है ,इसका मतलब यह नहीं

कि सामने वाला ग़लत ही हो .

ज़रूरत है सामने वाले की जगह पर जा कर

दुनिया को देखना उसके नज़रिए से …..

2 thoughts on “ज़िंदगी के रंग -78

  1. जी हाँ रेखा जी । सभी इस बात को समझ लें और अपनी सोच में उतार लें तो दुनिया में कोई किसी को कभी ग़लत न समझे ।

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    1. बिलकुल. हम सभी अक्सर लोगों को judge करते राहतें है और जिद्द होती है अपने आप को सही ठहराने की.

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