चोट

शरीर पर लगे

छोटे से छोटे चोट की

मरहम पट्टी हम तुरंत करते है .

पर दिल पर लगे चोट

मन के घाव के लिए

कुछ भी नहीं करते …

क्यों ……??

क्योंकि वह दिखता नहीं ??

28 thoughts on “चोट

  1. शरीर पर लगे घाव चाहे जैसे भी हो हम उसका इलाज कर लेते हैं क्योंकि वह हमारे कर्म क्षेत्र में आता है मगर दिल पर लगे चोट का इलाज हमारे कर्म क्षेत्र में कहां।उसका इलाज भी उसी के पास है जिसने चोट दिया है।

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    1. जिसने चोट दिया अगर वह ना आए तब ? अपने आप को मजबूत तो बनाना होगा और चोट खाए को सहारा भी देना होगा .

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      1. Absolutely. The situation teaches the person everything and we also learn but it is not the treatment of pain on the mind given by anyone. Treatment is in the true sense with which it hurts. Ravan stole Sita and gave pain to Ram. That pain was treated only by Ravana. This is my opinion.
        दिल या मन के चोट से सबक ले हम जीवन भले ही गुजार लें मगर वह पल जब जब याद आता है एक टिस उठती है| हम इंसान कितना भी ग्यानी बन जाएँ मगर इस सत्य को भुला नहीं सकते| हो सकता है एक पिता मन को ढाढस बंधा जीवन गुजार ले मगर पिता को जिस पुत्र ने अपमानित कर दिल दुखाया उसका इलाज उस पुत्र के पास ही है| अतः जिसने दर्द दिया इलाज उसी के पास है ये मेरा मानना है|

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      2. I completely agree with you Madhusudan.
        Mera Khayala yah bhi hai ki man ke chot ko bhi thik tarike se handle kiya jaay.
        Aajkal relationship and breakup’s jaisi baate common ho gai hai vaise me tutne ke badale samajhdaari se use bhi handle kar khud se majbut bannana chahiye.

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  2. बेहतरीन अल्फाज़…. संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित रचना|

    बहुत बड़ी बात है समझना दर्द-ए-दिल जज़्बात…
    मगर ये हुनर भी दिल टूटने के बाद ही आता है…
    – विनायक कुलाश्री…

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    1. शुक्रिया!!
      मैं अक्सर छोटी छोटी रचनायें हीं लिखती हूँ.
      दिल या मन को पहुँचे ठेस से दर्द तो होता हीं हैं. लेकिन हम उसे अहमियत नहीं देते .

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  3. बिल्कुल ठीक कहा है आपने| छोटी बातें अकसर बड़े सबक का सबब बन जाती हैं!!

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    1. बिलकुल सही और हम सब मन के चोट को अक्सर छुपाते भी हैं . यह सोंच कर कि लोग इसे हमारी कमज़ोरी ना समझ लें.

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