कुछ बातें !!

मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मागना क्योंकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का…..

कल एक इन्सान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों कि दुआयें दे गया, पता ही नहीँ चला की, गरीब वो था की मैं….

जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..

बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी…

खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं…

अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है कि माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये….

जिन्दगी तेरी भी अजब परिभाषा है.. सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है…

खुशीयाँ तकदीर में होनी चाहिये, तस्वीर मे तो हर कोई मुस्कुराता है…

ज़िंदगी भी वीडियो गेम सी हो गयी है एक लेवल क्रॉस करो तो अगला लेवल और मुश्किल आ जाता हैं…..

इतनी चाहत तो लाखों रुपये पाने की भी नही होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है…….

हमेशा छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो, क्योंकि इन्सान पहाड़ो से नहीं पत्थरों से ठोकर खाता है..

Forwarded message.

#Dangeroussilence तूफ़ान के पहले की शांति


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मौन मूल्यवान हैं, लेकिन

ज़िंदगी के इम्तिहान में,

बहुत बार मौन रह कर लगा…..

ख़ामोशी में भी गुब्बार होता हैं,

कभी कभी यह ख़ामोशी,

किसी का सहारा नहीं बनने देती हैं.

कभी देख कर भी अनदेखा

कर हम आगे बढ़ जाते हैं.

सुन कर भी अनसुना कर देते हैं.

पर यह अंतरात्मा के

रुदन का कारण बन जाती है.

और जब बंधन में बँधा

यह गुब्बार फूटता हैं

फ़लक की बिजलियाँ बन

यही शांति तूफ़ान बन

क़हर ढातीं हैं.

Topic for :

#IndiSpire237

Silence is not always a virtue. When there are serious wrongs happening, it is our duty to speak up. Otherwise we become part of the wrongdoing. Do you agree?

Happy birthday Krishna

                                             Happy Janamashtami !!!!

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Lord Krishna, Arjuna’s  friend and philosopher, intervened and gave to him wisdom that steered him to action. Lord Krishna’s teachings to Arjuna highlighted that all wars first exist in the mind. And thus winning in the mind is the first step to winning on the battlefield and in real life.

यदा, यदा, हि, धर्मस्य, ग्लानिः, भवति, भारत,
अभ्युत्थानम्, अधर्मस्य, तदा, आत्मानम्, सृजामिहम्।।
(भागवत गीता: अध्याय चार पद 7)


“Sri Krishna said: Whenever and wherever there is a decline in virtue/religious practice, O Arjuna, and a predominant rise of irreligion—at that time I descend Myself, i.e. I manifest Myself as an embodied being.”

“श्री कृष्ण भगवान ने कहा: जब जब भी और जहां जहां भी, हे अर्जुन, पुण्य / धर्म  की हानि होती है और अधर्म में वृद्धि होती है, तब तब मैं अवतार लेता हूँ “

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Radha-Krishan

courtesy :

1.Use Lord Krishna’s Teachings for Better Decision-Making – Common …

2. http://www.gitablog.com

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