Happy teacher’s day- 5 September

ध्यानमूलं गुरुर्मूर्तिः

पूजामूलं गुरुर्पदम् ।

मन्त्रमूलं गुरुर्वाक्यं

मोक्षमूलं गुरूर्कृपा ll

Meaning:

The Root of Meditation is the Form of the Guru,

The Root of Worship is the Feet of the Guru,

The Root of Mantra is the Word of the Guru,

The Root of Liberation is the Grace of the Guru.

ध्यान का मूल गुरु की मूर्ति (चित्र) है ।

पूजा का मूल गुरु के चरण कमलों हैं ।

मन्त्र का मूल गुरु के शब्द हैं ।

मोक्ष का मूल गुरु की कृपा है ।

अर्थात् ऐसे परमगुरु परमात्मा का ध्यान ही सर्वध्यानों का मूल है, उनके चरण-कमलों की पूजा ही सर्वपूजा का मूल है। श्री गुरु देव के मुखारविन्द के वचन ही सर्व मंत्रों का मूल हैं। उनकी कृपा ही मोक्ष का मूल है।

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