ब्लॉग की दुनिया #OnlineWriting

Edition 254

यहाँ मन के सागर मे, भरे दुख-सुख, खुशियाँ

लिखने-बाँटने वाले लोग हैं।

ना जाने कितने लेखकों, शायरों, कवियों को

लिखने की जगह मिल जाती है

ना जाने कितनी छुपी प्रतिभा पढ़ने,

मनन करने के लिये मिल जाती हैं।

यह कला क़ीमती संपत्ति अौर विरासत है।

फिर यहाँ तो सब अपना-अपना संचित

ज्ञान हीं बाँट रहें हैं, अपनी क्षमतानुसार।

अच्छा लगे तो समेट लो .

ना पसंद आये, लो हीं नहीं उनका ज्ञान ।

बेवकूफ मानना या नासमझ कहना बेकार है।

अौर अगर जिद है किसी को मूर्ख या जड़ कहने की !

तब यह नासमझी है कहने वाले की ?

मुझे तो बङी प्यारी अौर परिवार सी अपनी लगती है,

यह ब्लॉग की दुनिया।

 

Topic –

book, tech, lifestyle, food, and fashion reviewers and influencers, reviewers, and bloggers are idiots who hardly understand what they are doing. Do you agree? #OnlineWriting
Posted by Arvind Passey under Blogging

पुस्तक, तकनीक, जीवन शैली, भोजन, और फैशन समीक्षक और प्रभावकार, समीक्षक, और ब्लॉगर बेवकूफ हैं जो शायद ही समझते हैं कि वे क्या कर रहे हैं। क्या आप सहमत हैं? #OnlineWriting

 

 

शनिवार बाड़ा Shaniwarwada

शनिवार वाड़ा भारत के महाराष्ट्र के पुणे  में स्थित एक दुर्ग है जिनका निर्माण १८वीं सदी में १७४६ में किया था। यह मराठा पेशवाओं की सीट थी। जब मराठाओं ने ईस्ट इंडिया कम्पनी से नियंत्रण खो दिया तो तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध हुआ था तब मराठों ने इसका निर्माण करवाया था।  दुर्ग खुद को काफी हद तक आग से १८३८ में नष्ट हो गया था, लेकिन बची संरचनाएं अब एक पर्यटक स्थल के रूप में स्थित है।

कहा जाता है कि शनिवारवाड़ा परिसर सात मंजिला ऊँचा था। शीर्ष तल पर पेशवा का निवास था . जिसे मेघदम्बरी कहा जाता था। ऐसा कहा जाता है कि 17 किमी दूर आलंदी में स्थित जैनेश्वर मंदिर के शिखर को वहां से देखा जा सकता था।

Shaniwarwada  is a historical fortification in the city of Pune in Maharashtra, India. Built in 1732, it was the seat of the Peshwas of the Maratha Empire until 1818, when the Peshwas lost control to the British East India Company after the Third Anglo-Maratha War. Following the rise of the Maratha Empire, the palace became the center of Indian politics in the 18th century. The fort itself was largely destroyed in 1828 by an unexplained fire, but the surviving structures are now maintained as a tourist site.

It is said that the Shaniwarwada complex was seven storeys high. On the top floor was the residence of the Peshwa which was called Meghadambari. It is said that the spire of Jñāneśvar temple at Alandi, 17 km away, could be seen from there.

Main Gate of the Shaniwar Wad  शनिवार वाड़ा का मुख्य  प्रवेशद्वार

 

शनिवार वाड़ा  प्रवेशद्वार के अंदर , A hall in the first floor above dilli darwaja (Delhi Gate)

 

The stone base,

The stone base of the Shaniwar Wada remains and can be seen even today in the older parts of Pune.

 

        सुंदर बगीचा, गणपति द्वार और रंगमहल Beautiful garden, Ganpati gate and Rangmahal 

 

   A Canon of Peshwas time on an old  Pulling Cart पेशवाअों के समय की एक पुरानी तोप खींचनेवाली  गाड़ी पर।

 

The strongly built Dilli Darwaza

Images by Rekha Sahay.

Information courtesy – Wikipedia.

Rules of love – Rule 34

Submission does not mean being weak or passive.

It leads to neither fatalism nor capitulation.

Just the opposite.

True power resides in submission a power that comes within.

Those who submit to the divine essence of life will live in unperturbed tranquillity and peace even the whole wide world goes through turbulence after turbulence.

Shams Tabriz spiritual instructor of  Rumi ❤️❤️