ज़िंदगी के रंग – 116

प्यार से आसमान ,

पेड़ों , फूलों, पत्तों , पंछियों को देखो

और भर लो अपने अंदर गहरी लम्बी सासं,

लबों पर छाने दो हल्की की मुस्कुराहट,

कुछ देर बैठो अपने साथ .

गुफ़्तगू …..बातें करो अपने आप से .

जी लो ज़िंदगी के पल,

भूल ग़मों को .

यह ज़िंदगी नियामत है ऊपर वाले की .

कब तक टुकड़े टुकड़े में जीते और मरते रहोगे ?

13 thoughts on “ज़िंदगी के रंग – 116

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