Malala Yousafzai appeals to Imran Khan, Narendra Modi for peace

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एक कविता

कुछ शब्दों को चुनते, उठाते

क्रम से सजाते ,

उसमें ना जाने कब

रंग ….रौशनी …चमक भर गई.

ख़ुशबू….यादें छलक आई ,

भावनाएँ और विचार समा गए .

देखा तो वह सामने थी एक –

कविता !!!!!

सागर जैसे हम सब !

हम सब सागर जैसे है.

कभी गहरे शांत सागर सी शांत ज़िन्दगी.

कभी तूफ़ानी समंदर सी आती जाती ,

अनगिनत परेशानियों की लहरों में उलझे.

दिल में कई राज औ दर्द ,

सीपों में मोतियों सा छुपाए.

कभी पूनम की रात सा

चाँद को छूने के उल्लास से भरे .

क्या हम सब हैं सागर जैसे ?