खुशी

ख्याल आया , रात की ओस की बूँदे ना जाने

बंद फूलों पर क्या जादू करतीं हैं

वे जाग जाते है , खिल जाते है .

सुबह की छलकती रौशनी खिलखिलाई

धीरे से कानों में फुसफुसाई-

क्या सोंच रही हो?

ज़िंदगी में ख़ुशियों को ढूँढ़ते ना रहो .

बस हँस कर जी लो ज़िंदगी को .