सागर जैसे हम सब !

हम सब सागर जैसे है.

कभी गहरे शांत सागर सी शांत ज़िन्दगी.

कभी तूफ़ानी समंदर सी आती जाती ,

अनगिनत परेशानियों की लहरों में उलझे.

दिल में कई राज औ दर्द ,

सीपों में मोतियों सा छुपाए.

कभी पूनम की रात सा

चाँद को छूने के उल्लास से भरे .

क्या हम सब हैं सागर जैसे ?