ज़िन्दगी के रंग – 154

हम इंसान हर बात में भेदभाव,

अंतर खोज लेते हैं,

पर कैसा भी फूल क्यों ना हो,

बिना अंतर किए मधुमक्खी उससे

मीठा शहद बना ही लेती है.