ज़िंदगी के रंग – 156

एक छोटे से धूप के टुकड़े

का पीछा करते करते

ज़िंदगी पहुँच गई

बंद से खुले में

अंधेरे से रौशनी में.

रौशन हो उठा सारा जहाँ!!!