ज़िंदगी के रंग – 176

आने वाले कल

आएगा या नहीं, मालूम नहीं.

फिर भी सारी कायनात……

सारी योजनाएँ…….

उस पर टिकी होतीं हैं.

और बीते पतझड़ जिनका

अब कोई अस्तित्व नहीं,

उनके सूखे, पीले, उदास पत्ते,

बीते कल की ओर

खींच ले जाते हैं.

अपना आज हम सब

इन्हीं की सोचँ में बीता देते हैं.