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आर्कटिक बीज वॉल्ट “Doomsday Seed Vault” in the Arctic

On a desolate Arctic island, off the coast of Norway is the Svalbard Global Seed Vault, a repository with the capacity to hold up to 2.25 billion seeds in the event of a “doomsday” catastrophe.

 

क्या आप जानते हैं कि दुनिया में ऐसे शोध अौर काम भी चल रहें हैं?    जिसे  डूम्सडे  (प्रलय का दिन ) बीज वॉल्ट कहा जाता है?

स्वालबार्ड ग्लोबल बीज वॉल्ट  नॉर्वेजियन द्वीप पर एक सुरक्षित बीज बैंक है।  स्वाल्बार्ड ग्लोबल बीज वॉल्ट का मिशन पारंपरिक जीनबैंक  को आकस्मिक नुकसान से सुरक्षा  देने के लिये बनाया गया। यह  वैश्विक खाद्य फसलों के बीज को युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिये बनाया गया है। यहाँ दुनिया भर से बीज संग्रह किये गये हैं।

इस की शुरुआत नॉर्डिक जीन बैंक  ने 1 9 84 से, एक खाली कोयले की खदान में  बीजों को शुन्य से नीचे तापमान पर जमा कर  संग्रहित करे से हुआ।  बाद में बीज बैंक  स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट, निर्माण किया गया । जो बर्फीले आर्कटिक क्षेत्र के  एक  पर्वत के अंदर बना  है,  और मजबूत सुरक्षा प्रणालियों से लैस है। बीजों के कमरे को  -18 डिग्री सेल्सियस (-0.4 डिग्री फारेनहाइट) पर रखा जाता है। कम तापमान और सीमित ऑक्सीजन बीजों  को सुरक्षित रखते हैं।

 

 

 

 

The Hindu

Global Research

 

Image courtesy“Doomsday Seed Vault” ,  Arctic project.

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सबक- कविता

जिंदगी से एक गहरी सबक मिली।

किसी को परेशानियों में,

सलाह जरुर देनी चाहिये।

पर बिन माँगे  मदद के लिये,

हाथ भी बढ़ाना  देना चाहिये।

इसमें खतरा तो हैं,

पर

ना जाने कौन किस लम्हें  में,

किस  दौर से गुज़र रहा है?

जाने-अनजाने हीं किसी की दुआ मिल जाये।

Take Risks in Your Life If you Win, U Can Lead! If You Lose, You can Guide!
Swami Vivekanandalife

image from internet.

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युद्ध अौर शांती War and Peace

While God waits for His temple to be built of love, men bring stones.
Rabindranath Tagore

क्या  युद्ध की भयावहता हम भूल गये हैं ,

अौर शांती का मोल भी।

सीमाअों में बँध कर,

हम सारी सीमाएँ पार कर गये हैं।

State of emergency in Yemen’s Sanaa over cholera crisis
More than 184 Yemenis have been killed by a cholera epidemic that is gripping the Houthi-controlled Sanaa.  News

Yemen crisis: Who is fighting whom? BBC News

war

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कोई मुझ से पूछ बैठा…..

कोई मुझ से पूछ बैठा…..

कोई मुझ से पूछ बैठा, बदलना किस को कहते हैं?

सोच में पड़ गया हूँ, मिसाल किस की दूँ मौसम की या अपनों की!!!!!!

 

Source: कोई मुझ से पूछ बैठा…..

Dilsediltak

 

Image from internet.

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शब्दों का  चोला – कविता 

Don’t ask yourself what the world needs. Ask yourself what makes you come alive and then go do that. Because what the world needs is people who have come alive.
-Howard Thurman

कब क्या लिखती हूँ , 

मुझे भी नहीँ पता.

आजाद छोड़ दिया है

अपने मन और अंतरात्मा को.

यह दुनिया ही खट्टी मीठी झलकियाँ 

दिखलाती रहती है.

मै तो बस उन्हें  शब्दों का

चोला पहना देती हूँ.

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सुनहरी सुबह और रुपहली शाम – कविता

एक आदत सी थी,

बेफिक्री से गुनगुनाने और मुस्कुराने की।

सुनहरी सुबह और  रुपहली  शाम की ,

खूबसूरती में ङूब जाने की। 

पर ज़माने  ने  इसमें भी  कमियां निकाल दी।

तब ख्याल आया, 

अब तो 

खूबियों के सिवा कुछ बचा हीं नहीं ।

 हाथ जुङ गये  इबादत में।

When the world pushes you to your knees, you’re in the perfect position to pray.
~ Rumi

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काश -कविता

जिंदगी की ख्वाहिशों में, 

ना जाने कितने काश ,

शामिल हैं।

कुछ पूरे, कुछ अधुरे , कुछ खास …….

रुई से सफेद, बादलों से हलके  काश के फूलों की   तरह।

कुछ हवा के झोंकों में उङ गये।

कुछ आज भी पूरे होने के जिद में,

अटके हैं !!!!

 

 

 

काश / काँस  के फूल      –   मुझे कास के सफेद फूल’ हमेश से नाजुक अौर सुंदर लगते  हैं।  दशहरा  या शारदीय नवरात्र के आसपास ये जंगली फूल ताल, तलैया,  खेतों  के आसपास अौर जहाँ-तहाँ  दिखतें हैं।  काँस को देवी दुर्गा का स्वागत करता हुआ सुमन कहा जाता है । एक बार बङे शौक से इन फूलों को ला कर रखा। लेकिन जल्दी हीं ये हवा के झोंके के साथ पूरे घर में बिखर गये।   (   Saccharum spontaneum / wild sugarcane / Kans grass)

 

kash