Posted in चंद पंक्तियाँ

चेहरा

चेहरा क्या है?

ईश्वर प्रदत उपहार….

हमारे उम्र अौर विचारों की छाया।

पर ये लफ्ज , ये बोली,

 सच्चाई का  आईना है

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लौ अौर पतंगा

जबान चुप थी पर आँखोँ हीं आँखों में बातें हुईं –

तङपते पतंगे ने कहा – मैंने जला दिया अपने-आप को,

जान दे दी

तेरी खातिर।

अश्क  बहाती मोमबत्ती ने

कहा मैं ने भी तो तुम्हें

अपने दिल 

अपनी लौ  को चुमने की इजाजत दी।

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दिवाली में दीये

किसी ने पूछा –

दिवाली में दीये तो जला सकतें हैं ना?

ग्लोबल वार्मिंग की गरमाहट

तो नहीं बढ़ जायेगी……

नन्हा दीया हँस पङा।

अपने दोस्तों को देख बोला –

देखो इन्हें जरा…..

सारी कायनात  अपनी गलतियों से जलाने वाले

हमारी बातें कर रहें हैं।

जैसे सारी गलती हमारी है।

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इत्रे गुलाब

मुट्ठी में दबे,

मसले – कुचले गुलाबों 

की खुशबू फ़िजा में तैर गई।

हथेलियाँ इत्रे गुलाब अर्क

से भर गईं

क्या हम ऐसे बन सकते हैं? 

मर्म पर लगी चोट 

पीङा नहीं सुगंध  दे ???

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जिंदगी के रंग – 34 (रूपांतरण / Metamorphosis)

यादें हँसाती हैं, गुदगुदाती हैं………

ये खजाने  हैं  बीते पलों के

पर कुछ रुला भी  जातीं हैं।

पर यह भी एहसास दिला जातीं हैं……

तितलियों के  रूपांतरण (metamorphosis)

जैसा बदल  लो  जिंदगी को।

जी लो हर पल को ……….

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जिंदगी के रंग -33

दिल पर लगी चोट,

आँसू बन कर बह जाते हैं।

सूखी आँखें अौर

वर्षा के बाद के

धुले असमान देख कर क्या लगता है ,

कभी इतनी तेज़ आँधी आई थी?