Posted in चंद पंक्तियाँ, hindi poem

रिश्ते

झुक कर रिश्ते निभाते-निभाते एक बात समझ आई,
कभी रुक कर सामनेवाले की नज़रें में देखना चाहिये।
उसकी सच्चाई भी परखनी चाहिये।
वरना दिल कभी माफ नहीं करेगा
आँखें बंद कर झुकने अौर भरोसा करने के लिये।

Advertisements
Posted in चंद पंक्तियाँ, hindi poem

तन्हाई से मुलाकात

तन्हाई से मुलाकात हुई,

उसने अपनी भीगी पलकों को खोली,

…..बोली

मैं भी अकेली …..

क्या हम साथ  समय

बिता सकते हैं?

हम नें कहा – हाँ जरुर …..

अकेलेपन अौर पीङा से

गुजर कर हीं कला निखरती है।

Posted in चंद पंक्तियाँ, hindi poem

खूबसूरती  से निभाना

रिश्ते बनाने, रूलाने, झुकाने या भँजाने के लिये नहीं

निश्छलता अौर खूबसूरती  से निभाने के लिये होते हैं !

Posted in चंद पंक्तियाँ, hindi poem

अकेलापन

अकेलापन कभी डराता है, कभी सहलाता है।

कभी ख्वाबों ख़यालों में ले जाता है….

तब

कवितायें- कहानियाँ जन्म लेने लगतीं हैं

नये वजूद- चरित्र, मित्र बन

गले में बाहेँ डाल

अपनी दुनिया में खींच ले जाते हैं !!!!!!

Posted in चंद पंक्तियाँ, hindi poem

ज़िंदगी के रंग – 53

सूरज ङूबने वाला था,

ना जाने क्यों ठिठका ?

अपनी लालिमा के साथ कुछ पल बिता

पलट कर बोला – अँधेरे से ङरना मत ।

यह रौशनी-अधंकार कालचक्र है।

नया सवेरा लेकर

मैं कल फिर आऊँगा !!!!!

 

 

image by Rekha Sahay

Posted in चंद पंक्तियाँ, hindi poem

ठोकर

जीवन में किसी ने जब कभी 

धोखा दिया,

 समझदार बना दिया,

धक्का  दिया ,

तैराक बना दिया।

समयजमाने की ठोकरें     

जीवन  तराश देती है 

 किसी मूर्तिकार की तरह ।