Posted in हिंदी कविता -समाचार आधारित, hindi post based on new

बस हम ही हम हों …..

रोहिंग्या  इस्लाम को मानने वाले  म्यांमार के अराकान प्रांत में रहने वाले लोग हैं।

The Rohingya people,  historically also termed Arakanese Indians  are a stateless,  Indo-Aryan people from Rakhine State, Myanmar.

News  

Rohingya

Rohinyang  India

 

दुनिया में बस हम ही हम हों …..

ये कैसी सोंच  है ??

कुछ कारण नहीँ समझ आता इसका .

धरती गगन ने ढेरों रंग दिये .

ईश्वर ने भी नहीँ सोचा – एक ही रंग में हो दुनिया.

फ़िर हम में इतनी निर्दयता -असहनशीलता क्यों ?

धर्म , रंग, भाषा , जाति …….के नाम पर ?

किसी को ख़त्म कर भी दिया तो क्या मिलेगा ?

किसने सही किया ?

ईश्वर ने विविधता दे कर या

मानव ने अपनी क्रूरता दिखा कर …..??

Advertisements
Posted in हिंदी कविता -समाचार आधारित, Poem based on news

गौर करें

गौरी लंकेश को समर्पित -Tribute to Journalist Gauri Lankesh

NEWS – Gauri Lankesh: Indian journalist shot dead in Bangalore

FREEDOM OF SPEECH AND EXPRESSION – Article 19

 

गौर करें 

इतना साहसी  ( कायर)…

इतना शक्तिशाली ( कमजोर)…..

वह कौन है?

जिसे  नियमों -कानूनों का

भय नहीं ? 

 पर भय है एक महिला के कलम से ।

क्या  महिलायें कमजोर हैं ?

या गलत लोगों में कमजोर होने का भय पैदा कर सकती हैं?  

Posted in हिंदी कविता -समाचार आधारित

एक टुकड़ा जिंदगी का 

News -At least70 kids died.

At least70 kids have died over the course of 5 days at the Baba Raghav Das Medical College hospital in Gorakhpur, Uttar Pradesh. Authorities have launched an inquiry into the causes of the oxygen disruption but denied reports that it had caused the deaths at the state-run hospital.

​कभी पढ़ा सैकडों लीटर खून बर्बाद हो गया ,

अब बिना हवा -आक्सीजन बच्चे …..

ना जिम्मेदारी है , न जीवन का मोल.

पर बेजान घरों  और कब्रों 

पर नाम लिख दावेदारी दिखाने में 

हम कमी नहीं करते।

एक टुकड़ा जिंदगी का ,

ये बच्चे

कितने अनमोल है ,

उनसे पूछो, जिनके मासूम 

बिना साँस लिये चले गये……


Posted in हिंदी कविता -समाचार आधारित, Uncategorized

ज़माने का दौर – कविता

News – Blast at Chinese kindergarten was a bomb attack

  Nursery blast kills seven in China’s Xuzhou

हमारे स्कूल पर बम गिरते हुए …..
क्या उनके जेहन में एक बार भी, 
अपने घरों, बच्चों का ख़याल आया था ?

लोग इतने क्रूर क्यों है ?
हमने उनका क्या बिगाडा था ?
हम इस कठोर दुनिया के लिये नहीँ बने ……

इसलिये दुनिया से विदा हो गये ।
पर , इतने बड़े  अपराध बोध के साथ ……
क्या ऐसे लोग चैन से जी सकेगें ??

k1.png

“ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहे हैं, अगर आप उससे वाकिफ़ नहीं हैं तो मेरे अफसाने पढ़िये और अगर आप इन अफसानों को बरदाश्त नहीं कर सकते तो इसका मतलब है कि ज़माना नाक़ाबिले-बरदाश्त है। मेरी तहरीर(लेखन) में कोई नुक़्स नहीं । जिस नुक़्स को मेरे नाम से मनसूब किया जाता है, वह दरअसल मौजूदा निज़ाम का एक नुक़्स है। मैं हंगामा-पसन्द नहीं हूं और लोगों के ख्यालात में हैज़ान पैदा करना नहीं चाहता। मैं तहज़ीब, तमद्दुन, और सोसाइटी की चोली क्या उतारुंगा, जो है ही नंगी। मैं उसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नहीं करता, क्योंकि यह मेरा काम नहीं, दर्ज़ियों का काम है ।”
― Saadat Hasan Manto

Posted in हिंदी कविता -समाचार आधारित, Uncategorized

कलाकार- कविता Playing with the Placards

Editorial of The Indian Express  April 26, 2017

It is one of actor Nawazuddin Siddiqui’s shortest, simplest and strongest performances. Appearing in a video just over one minute in length, the actor holds up a series of placards; these read, in succession: “I got a DNA test done. The result showed I was 16.66 per cent Hindu, 16.66 per cent Muslim…”, covering Sikhism, Christianity, Buddhism and world religions too. With each placard, Siddiqui wears stereotypical “markers” — a Hindu caste daub, a Muslim sherwani-topi, a Sikh turban, Buddhist robes. At the end, a placard concludes: “When I discovered my soul, I found that I am a 100 per cent artist”. Saying no lines, Nawazuddin’s video says a lot, for it speaks against power at several levels.

बिना बोले,

 सब कुछ,

बोलना भी एक कला है।

हम झगङ रहे हैं,

जात-धर्म, रंग , देश , सीमा……..

जैसी बातों के लिये।

क्यों एक अच्छे इंसान के रुप,

में जी नहीं सकते  हम ?

News courtesy  The Indian Express, image from internet.

Posted in हिंदी कविता -समाचार आधारित, Uncategorized

खून की कीमत -कविता 6 lakh litres of blood wasted

 

The Times of India,    The Economics Time     zee news  Apr 24, 2017, India

No coordination between blood banks and hospitals, 6 lakh litres of blood wasted in five years.

New Delhi: Indicating that there is serious gaps in the country’s blood banking system, over 28 lakh units of blood and its components were wasted in five years by banks across India, as per a report.

India, with its population of 1.2 billion people, requires 12 million units of blood annually, however, only nine million units are collected every year. The country faces a blood shortage of three million units. It is said that NCR alone faces a shortage of 1,00,000 units per year.

खून की कमी से,

लोग मर जाते हैं,

कितने इसे खरीद नहीं पाते,

 और हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं,

पर बड़ी-बड़ी बातों का मूल क्या है ?

हमें संभालना  तक नहीं आता है

किसी ने कहा,  इन खबरों को

दिल पर ना ले।

                                                                    यह नासमझी की हमारी,

 

परंपरा  पुरानी है।

जीवन अौर मौत  के बीच झुलते लोगों से पूछो,

इसका मोल क्या है?

 

Image courtesy  Internet.

Posted in हिंदी कविता -समाचार आधारित, Uncategorized

लाल बत्ती- भूलना मुश्किल है ! – कविता Red Light- Poetry

News, The Hindu, India.FRIDAY, APRIL 21, 2017

The government has decided to do away with beacons of all kinds atop all categories of vehicles in the country as it is of the considered opinion that beacons on vehicles are perceived symbols of VIP culture, and have no place in a democratic country. They have no relevance whatsoever,” the Road Transport and Highways Ministry said in a statement later.

लाल बत्ती भी क्या चीज है ?

 किसी उच्च पुलिस पदाधिकारी की लाल बत्ती कार

 सरेआम ट्रैफिक रूल को तोड़ती  आगे बढ़ गई।

           इसे भूलना मुश्किल है!!!!!

दूसरी लाल बत्ती  ऑपरेशन थिएटर की,

किसी के ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के दौरान 6- 8 घंटे बैठकर,

उस लाल बत्ती को  अनिश्चितता से निहारना,

उसे भी भूलना मुश्किल है!!!!

तीसरी लालबत्ती – रेड लाइट एरिया,

सच्चाई समझना हो, तो इनका दर्द महसूस   करना होगा,

इन  की  जिंदगी क्या है? जानने के बाद,

भूलना मुश्किल होगा!!!!!!

चलो एक लाल बत्ती  तो हटी।

दूसरी लाल बत्ती जीवनदायीनी है,

काश, तीसरी रेड लाइट (एरिया) के बारे में भी लोग सोचें…………

Image courtesy internet.