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सुनहरे रेत में, सोने में ढलते सपने

News – Saudi Arabia’s proposed $500 billion mega-city

 

जहाँ चारो अोर रेत का  समंदर है,

वे भी बिना ङरे सबसे आगे जाने ,

नये हौसले दिखाने का साहस कर रहें हैं,

फिर हम तो सामर्थवान हैं।

युवा शक्ति अौर योग गुरु हैं।

बस सुनहरे सपने देखने अौर

उसे पूरा करने के हौसले की  हीं तो जरुरत है।

 

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पाषण युग Stone age

NEWS 12 oct 2017 –   Body of newborn girl found in hospital toilet.
The patient informed hospital authorities, who alerted the police. Soon, a team from the Bundgarden police station reached the spot. Later, the newborn’s body was sent for post-mortem.

 

पाषण युग से आज तक की

लम्बी प्रगति यात्रा

 पूरी करने में ना जाने कितनी सादियाँ लगी.

पर कुछ क्रुर पाषाण हृदय वाले

 पल भर में वापस वहीँ कैसे लौट जाते है ?

उनकी तुलना पशुओं से भी नहीँ कर सकते

क्योंकि वे भी ऐसा  जघन्य कुकर्म नहीँ करते .

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बस हम ही हम हों …..

रोहिंग्या  इस्लाम को मानने वाले  म्यांमार के अराकान प्रांत में रहने वाले लोग हैं।

The Rohingya people,  historically also termed Arakanese Indians  are a stateless,  Indo-Aryan people from Rakhine State, Myanmar.

News  

Rohingya

Rohinyang  India

 

दुनिया में बस हम ही हम हों …..

ये कैसी सोंच  है ??

कुछ कारण नहीँ समझ आता इसका .

धरती गगन ने ढेरों रंग दिये .

ईश्वर ने भी नहीँ सोचा – एक ही रंग में हो दुनिया.

फ़िर हम में इतनी निर्दयता -असहनशीलता क्यों ?

धर्म , रंग, भाषा , जाति …….के नाम पर ?

किसी को ख़त्म कर भी दिया तो क्या मिलेगा ?

किसने सही किया ?

ईश्वर ने विविधता दे कर या

मानव ने अपनी क्रूरता दिखा कर …..??

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गौर करें

गौरी लंकेश को समर्पित -Tribute to Journalist Gauri Lankesh

NEWS – Gauri Lankesh: Indian journalist shot dead in Bangalore

FREEDOM OF SPEECH AND EXPRESSION – Article 19

 

गौर करें 

इतना साहसी  ( कायर)…

इतना शक्तिशाली ( कमजोर)…..

वह कौन है?

जिसे  नियमों -कानूनों का

भय नहीं ? 

 पर भय है एक महिला के कलम से ।

क्या  महिलायें कमजोर हैं ?

या गलत लोगों में कमजोर होने का भय पैदा कर सकती हैं?  

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एक टुकड़ा जिंदगी का 

News -At least70 kids died.

At least70 kids have died over the course of 5 days at the Baba Raghav Das Medical College hospital in Gorakhpur, Uttar Pradesh. Authorities have launched an inquiry into the causes of the oxygen disruption but denied reports that it had caused the deaths at the state-run hospital.

​कभी पढ़ा सैकडों लीटर खून बर्बाद हो गया ,

अब बिना हवा -आक्सीजन बच्चे …..

ना जिम्मेदारी है , न जीवन का मोल.

पर बेजान घरों  और कब्रों 

पर नाम लिख दावेदारी दिखाने में 

हम कमी नहीं करते।

एक टुकड़ा जिंदगी का ,

ये बच्चे

कितने अनमोल है ,

उनसे पूछो, जिनके मासूम 

बिना साँस लिये चले गये……


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ज़माने का दौर – कविता

News – Blast at Chinese kindergarten was a bomb attack

  Nursery blast kills seven in China’s Xuzhou

हमारे स्कूल पर बम गिरते हुए …..
क्या उनके जेहन में एक बार भी, 
अपने घरों, बच्चों का ख़याल आया था ?

लोग इतने क्रूर क्यों है ?
हमने उनका क्या बिगाडा था ?
हम इस कठोर दुनिया के लिये नहीँ बने ……

इसलिये दुनिया से विदा हो गये ।
पर , इतने बड़े  अपराध बोध के साथ ……
क्या ऐसे लोग चैन से जी सकेगें ??

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“ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहे हैं, अगर आप उससे वाकिफ़ नहीं हैं तो मेरे अफसाने पढ़िये और अगर आप इन अफसानों को बरदाश्त नहीं कर सकते तो इसका मतलब है कि ज़माना नाक़ाबिले-बरदाश्त है। मेरी तहरीर(लेखन) में कोई नुक़्स नहीं । जिस नुक़्स को मेरे नाम से मनसूब किया जाता है, वह दरअसल मौजूदा निज़ाम का एक नुक़्स है। मैं हंगामा-पसन्द नहीं हूं और लोगों के ख्यालात में हैज़ान पैदा करना नहीं चाहता। मैं तहज़ीब, तमद्दुन, और सोसाइटी की चोली क्या उतारुंगा, जो है ही नंगी। मैं उसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नहीं करता, क्योंकि यह मेरा काम नहीं, दर्ज़ियों का काम है ।”
― Saadat Hasan Manto

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कलाकार- कविता Playing with the Placards

Editorial of The Indian Express  April 26, 2017

It is one of actor Nawazuddin Siddiqui’s shortest, simplest and strongest performances. Appearing in a video just over one minute in length, the actor holds up a series of placards; these read, in succession: “I got a DNA test done. The result showed I was 16.66 per cent Hindu, 16.66 per cent Muslim…”, covering Sikhism, Christianity, Buddhism and world religions too. With each placard, Siddiqui wears stereotypical “markers” — a Hindu caste daub, a Muslim sherwani-topi, a Sikh turban, Buddhist robes. At the end, a placard concludes: “When I discovered my soul, I found that I am a 100 per cent artist”. Saying no lines, Nawazuddin’s video says a lot, for it speaks against power at several levels.

बिना बोले,

 सब कुछ,

बोलना भी एक कला है।

हम झगङ रहे हैं,

जात-धर्म, रंग , देश , सीमा……..

जैसी बातों के लिये।

क्यों एक अच्छे इंसान के रुप,

में जी नहीं सकते  हम ?

News courtesy  The Indian Express, image from internet.