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सबक- कविता

जिंदगी से एक गहरी सबक मिली।

किसी को परेशानियों में,

सलाह जरुर देनी चाहिये।

पर बिन माँगे  मदद के लिये,

हाथ भी बढ़ाना  देना चाहिये।

इसमें खतरा तो हैं,

पर

ना जाने कौन किस लम्हें  में,

किस  दौर से गुज़र रहा है?

जाने-अनजाने हीं किसी की दुआ मिल जाये।

Take Risks in Your Life If you Win, U Can Lead! If You Lose, You can Guide!
Swami Vivekanandalife

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कोई मुझ से पूछ बैठा…..

कोई मुझ से पूछ बैठा…..

कोई मुझ से पूछ बैठा, बदलना किस को कहते हैं?

सोच में पड़ गया हूँ, मिसाल किस की दूँ मौसम की या अपनों की!!!!!!

 

Source: कोई मुझ से पूछ बैठा…..

Dilsediltak

 

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शब्दों का  चोला – कविता 

Don’t ask yourself what the world needs. Ask yourself what makes you come alive and then go do that. Because what the world needs is people who have come alive.
-Howard Thurman

कब क्या लिखती हूँ , 

मुझे भी नहीँ पता.

आजाद छोड़ दिया है

अपने मन और अंतरात्मा को.

यह दुनिया ही खट्टी मीठी झलकियाँ 

दिखलाती रहती है.

मै तो बस उन्हें  शब्दों का

चोला पहना देती हूँ.

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सुनहरी सुबह और रुपहली शाम – कविता

एक आदत सी थी,

बेफिक्री से गुनगुनाने और मुस्कुराने की।

सुनहरी सुबह और  रुपहली  शाम की ,

खूबसूरती में ङूब जाने की। 

पर ज़माने  ने  इसमें भी  कमियां निकाल दी।

तब ख्याल आया, 

अब तो 

खूबियों के सिवा कुछ बचा हीं नहीं ।

 हाथ जुङ गये  इबादत में।

When the world pushes you to your knees, you’re in the perfect position to pray.
~ Rumi

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काश -कविता

जिंदगी की ख्वाहिशों में, 

ना जाने कितने काश ,

शामिल हैं।

कुछ पूरे, कुछ अधुरे , कुछ खास …….

रुई से सफेद, बादलों से हलके  काश के फूलों की   तरह।

कुछ हवा के झोंकों में उङ गये।

कुछ आज भी पूरे होने के जिद में,

अटके हैं !!!!

 

 

 

काश / काँस  के फूल      –   मुझे कास के सफेद फूल’ हमेश से नाजुक अौर सुंदर लगते  हैं।  दशहरा  या शारदीय नवरात्र के आसपास ये जंगली फूल ताल, तलैया,  खेतों  के आसपास अौर जहाँ-तहाँ  दिखतें हैं।  काँस को देवी दुर्गा का स्वागत करता हुआ सुमन कहा जाता है । एक बार बङे शौक से इन फूलों को ला कर रखा। लेकिन जल्दी हीं ये हवा के झोंके के साथ पूरे घर में बिखर गये।   (   Saccharum spontaneum / wild sugarcane / Kans grass)

 

kash

 

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जिंदगी के रंग -कविता 9

Female weeper / weeping woman / professional mourners – In some part of Rajasthan, India, women (of a specific caste ) are hired as professional mourners . They are know as “rudaali” /female weeper/ weeping woman . Their job is to publicly express grief for family members who are not permitted to display emotion due to social status.

कुछ लोग हँस कर ,

और कुछ हँसा कर

कमाते हैं.

कुछ लोग रो कर (रुदाली )

और कुछ लोगों को रुला कर.

रुलाने वाले क्या जवाब देंगे ?

जब

ऊपर वाला उनसे पूछेगा –

उन्होंने क्या कमाया ?

राजस्थान में कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथा हैं. जिसमें सम्पन्न परिवारों में रो कर मातम मानने के लिये रुदाली ( जाति विशेष की महिलायें ) बुलायी जाती हैं.

Source: जिंदगी के रंग -कविता 9

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चाहत -कविता

गर चाहत हो, ईमानदारी हो,

कमजोर की हिफाजत में भी चीजें  महफूज रह सकती हैं

जैसे मिट्टी के गुल्लक में

 लोहे के सिक्के