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कहाँ से इंद्रधनुष निकला है ?

बरसात की हलकी फुहार

के बाद सात रंगों की

खूबसूरती बिखेरता इंद्रधनुष निकल आया।

बादलों के पीछे से सूरज की किरणें झाँकतीं

कुछ खोजे लगी….. बोली….

खोज रहीं हूँ – कहाँ से इंद्रधनुष निकला है ?

इंद्रधनुष की सतरंगी आभा खिलखिला कर हँसी अौर

कह उठी – तुम अौर हम एक हीं हैं,

बस जीवन रुपी वर्षा की बुँदों से गुजरने से

मेरे अंदर छुपे सातों रंग दमकने लगे हैं।

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जिंदगी के रंग – 35

समय की लहरें ना जाने

कहाँ खींच ले जाती हैं?

कभी मन के अंदर होती हैं

लहरों की आवाज़ें अौर मौजें

कभी ख़ामोशी…नीरवता…..

बदलता समय  ना  जाने कितने रंग  दिखाता है।

रंग बदलते,   कितने लोग  आते जाते हैं।

भीतर लहरों की आवाज़ हीं

प्रेम अौर प्रकाश देने वाली बन जाती है।

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जुनून अौर जोश

अपने  विचारों को

पढ़ने अौर पकङने के जुनून अौर जोश ने

मनन करना सीखा दिया।

मन के   विचारों  

को पन्नों पर  

शब्द जाल बना कर, ऊतारना  सीखा दिया।

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जीवन के रंग – 32

इस जीवन यात्रा में…..

एक बात तो बङे अच्छे से समझ आ गई,

अपनी लङाई खुद ही लङनी  होती है।

इसमें

शायद ही कोई साथ देता है,

क्योंकि

  लोग   अपनी लङाईयों अौर उलझनों में उलझने होते हैं।

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जीवन के रंग  – 31 सघन अँधेरा 


कालरात्रि सा सघन अँधेरा , 

आता  है जीवन में हर रोज़ .

पर 

आकाश के  एक एक कर 

बूझते सितारे,

करते है सूरज 

औ भोर की 

किरणों का आगाज …..

बस याद रखना है –

हर रात की  होती  है

 सुहानी भोर !!!



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नमन !!

I stare at the sky at night…….. destiny has  taken away my brightest star, and it’s you my dad.    Wish you Best birthday!

लाखों शब्दों में भी कुछ अनुभव

एक तस्वीर नहीं बना सकती।

जैसे उन्मुक्त आकाश  का  ….

पूरा का पूरा चित्रण  नहीं होता।

स्मृति, यादें ….धरोहर रह गईं।

शेष हुई वह ज्योति, शेष हुआ  वह शंखनाद….

आज शब्दों मे बाँधे बिना नमन है !!!!

 

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जिंदगी के रंग – 27

बेचैन लहरें किनारे पर सर पटकती,

कह रहीं हैं – ये सफेद झाग, ये खूबसूरत बुलबुले

बस कुछ पल के लिये हैं।

जिंदगी की तरह……

बीत रहे वक्त अौ लम्हे को…..

जी लो जी भर के।