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   बच्चों सी  मीठी हँसी 

ढेर सारी मीठी मीठी हँसी

छलक छलक कर बिखर गई।

बरसाती, उफनती  नदी सी बह कर सभी को

अपने साथ गीली करती भिगो गई।

कांटों भरी, संघर्ष शिखर लगते हालातों में

हौसले ,  ताकत, सबक  दे जाती हैं

बच्चों की  यह मासूमियत ।

इसलिये बचपना बचाये रखना !!!!!

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मैं एक लड़की ( कविता 1 )

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 4

 

इस दुनिया मॆं मैने
आँखें खोली.
यह दुनिया तो
बड़ी हसीन
और रंगीन है.

मेरे लबों पर
मुस्कान छा गई.
तभी मेरी माँ ने मुझे
पहली बार देखा.
वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया

और बोली -लड़की ?
तभी एक और आवाज़ आई
लड़की ? वो भी सांवली ?

Source: मैं एक लड़की ( कविता 1 )

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नाम -कविता 

खिला खिला गुलमोहर तपिश में मोहरें लूटाता रहा…..

पूरा चाँद,  रात भर  जल कर चाँदनी बाँटता  रहा.

ना पेड़ों ने कहीँ अपना नाम लिखा ना शुभ्र गगन में चाँद ने.

और हम है घरों – कब्रों पर अपना नाम लिखते रहते है.

 

half

 

Images from internet.

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बेलगाम   ख्वाहिशें-  कविता 

कुछ ख्वाहिशें बेलगाम उडती,

 बिखरती रहती है हवा के झोंकों सी.

 सभी अरमानों को पूरा करना मुशकिल है,

और  बंधनों में बाँधना भी मुश्किल है.

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धोखा -कविता Trust

It takes years to build up trust, only seconds to destroy it. But betrayal has its positive side too.

“Out of suffering have emerged the strongest souls; the most massive characters are seared with scars.”
― Kahlil Gibran

 

 किसी ने धोखा क्या दिया ,

आंखे खुल गई।

                                गैरों अौर अपनों की पहचान मिल गई।

आँखों में धूल  झोंकी ,

     दुनिया और बेहतर नजर आने लगी………..

 

Image from internet.

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मंदिर- कविता

मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे….

में हम सब के  जलाये , 

अगरबत्ती, मोमबत्ती, दीप……..

जलने के बाद

इनकी  धूम्र रेखाएं अौर  रौशनी

आपस में   ऐसे घुलमिल जातीं हैं,

अगर चाहो भी तो अलग नहीं कर सकते।

हम कब ऐसे घुलना-मिलना सीखेंगे?

 

image courtesy internet.

 

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अमलतास – कविता, golden shower flower

Golden shower tree  is an ayurvedic medicine,  also known as aragvadha – “disease killer” 

आयुर्वेद – अमलतास वृक्ष के सभी भाग औषधि के काम में आते हैं। यह  पित्तनिवारक, कफनाशक तथा वातनाशक हैं। 

स्वर्णपुष्पी कहो या अमलतास,

जलती गर्मी, तप्ते धूप में

स्वर्ण सा दमकता,

नाजुक पंखुङियों के

साथ हवा के झोंके से,

कानों के झुमके सा झुमता, झूलता!!!!!

  प्रचंङ ताप में,

कैसे रहता इतना

ताजा, सुकुमार अौर मनमोहक?

Image from internet.