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इंडोनेशिया पितृपूजा – एक विचित्र प्रथा

 

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पूर्वजों की उपासना के लिये पितृपक्ष, श्राद्ध  की परंपरा या पितृपूजा किसी न किसी रूप में प्राय हर जगह होती  है। हमारे यहाँ नव रात्री के पहले के १५ दिन पितृपक्ष कहलाता है। इस समय लोग अपने गुजरे स्वजनों को सम्मान देते हुए पितर या पितृपूजन करते हैं।

  इंडोनेशिया के  तोजारान लोगपितृपूजा को एक  महोत्सव के  रूप में मनाते हैं। वे हर तीन साल के बाद कब्र से अपने मृत रिश्तेदारों के शव को घर लाते हैं।  उनकी लाशों को साफ कर  नये कपड़े पहनाते हैं। वे परिजनों को हमेशा अपने बीच बनाये रखना चाहते है। यह वहाँ की प्राचीन पर विचित्र  परंपरा है।

 

 

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पोक्सो- बच्चों के लिए कानून ( महत्वपूर्ण जानकारी ) समाचार आधारित

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हमारे देश में बच्चों के लिए कड़े कानून की जरूरत कई बार महसूस की गई। पहले भारत में बाल मुकदमों की प्रक्रिया जटिल और थकाने वाला था। अतः भारत की संसद अधिनियम में 22 मई 2012 को बाल यौन शोषण के खिलाफ बच्चों का संरक्षण कानून पारित किया।

आज विश्व में बच्चों की सब से बड़ी आबादी भारत में है । हमारे देश में लगभग 42 प्रतिशत आबादी अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों की है। अतः बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा महत्वपूर्ण है। ये बच्चे भविष्य की अनमोल निधि है।
यह अधिनियम अठारह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाया गया है। यह बच्चों के स्वस्थ, शारीरिक, भावनात्मक , बौद्धिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित करने को महत्व देता है। बच्चे के साथ मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न या दुर्व्यवहार दंडनीय है। इस अधिनियम के तहत कठोर दंड का प्रावधान है ।

बच्चों के साथ हो रहे यौन अपराधों को नियंत्रित करने के लिए “प्रोटेक्सन ऑफ चिल्ड्रेन फ़्रोम सेक्सुयल ओफ़ेंसेस” कानून बनाया गया। यह दो वर्ष पहले बच्चों के सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून है। पर यह कानून बहुत कम लोगों को मालूम है। अतः इसका पूरा फ़ायदा लोगों को नहीं मिल रहा है। इसलिए लोगों के साथ-साथ बच्चों और सभी माता-पिता को भी इसकी समझ और जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही बच्चों में सही-गलत व्यवहार की समझ और निर्भीकता भी विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि सभी माता-पिता बच्चों की सभी बातों को सुने और समझे।
लोगों में जागरूकता लाने के लिए मीडिया, लेखकों, पत्रकारों को सहयोग महत्वपूर्ण है। अतः कलम की ताकत का भरपूर उपयोग करना चाहिए।

 

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अनुत्तरित प्रश्न …(ये है जिन्दगी ?)

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वियतनामी महिला ने १ करोङ ५७ हजार रुपये की बीमा के लिये हाथ-पैर कटवाए (समाचार 26 Aug 2016)

वियतनामी महिला ने १ करोङ ५७ हजार रुपये की बीमा के लिये हाथ-पैर कटवाए। आज के इस समाचार ने दिल दहला दिया। मन में हलचल पैदा हो गई। उसकी ऐसी क्या मजबूरी रही होगी? सिर्फ पैसों के लालच में ऐसा किया या कुछ अौर परेशानी थी ? ये है जिन्दगी ?

हजारों अनुत्तरित प्रश्न ………….

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मनोविज्ञन#3- धर्म मेँ मनोविज्ञन का छिपा रहस्य Psychology and religion / spirituality

 

 Psychology in religion – Religion is a learned behaviour, which has a strong and positive impact on human personality, if followed properly.

धर्म बचपन से सीखा हुआ व्यवहार है. अपने अराध्य या  ईश्वर के सामने अपनी मनोकामनायेँ कहना या अपनी भूल  कबुलना, ये  हमारे सभी बातेँ व्यवहार को साकारात्मक रुप से प्रभावित करती हैँ. जो मनोविज्ञान का भी उद्देश्य  है.

 प्रार्थना, उपदेश, आध्यात्मिक वार्ता, ध्यान, भक्ति गीत, भजन आदि सभी गतिविधियाँ  धर्म का हिस्सा हैँ. ध्यान देँ तब पायेंगेँ , ये सभी किसी ना किसी रुप मेँ हम पर साकारात्मक असर  डालतीँ  हैँ. अगर गौर करेँ, तब पयेँगेँ ये सभी व्यवहार किसी ना किसी रुप में  मनोवैज्ञानिक

  • ये आत्म प्रेरणा या  autosuggestion देते हैँ.
  • अपनी गलतियोँ को स्वीकार करने से मन से अपराध  बोध/ गिल्ट कम होता है
  • अंतरात्मा की आवाज सुनने की सीख, अपनी गलतियोँ को समझने की प्रेरणा देता है.
  • सोने के पहले अपने दिन भर के व्यवहार की समिक्षा करने की धार्मिक शिक्षा मनोविज्ञान का  आत्म निरीक्षण या introspection है.

अध्ययनोँ से भी पता चला है – ध्यान, क्षमा, स्वीकृति, आभार, आशा और प्रेम जैसी धार्मिक परंपराएँ हमारे व्यक्तित्व पर प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक असर डलता हैं।

 

clinical reports suggest that rehabilitation services can integrate attention to spirituality in a number of ways.

(“Spirituality and religion in psychiatric rehabilitation and recovery from mental illness”- ROGER D. FALLOT Community Connections, Inc., Washington, DC, USA International Review of Psychiatry (2001), 13, 110–116)

 

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ब्लॉग लेखन टिप्स                   (Blog writing tips )

 

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(Age old practice of writing , black on white is best.

Don’t be too  ornamental.

 bold font may be used for strong expression.)

मुझे इस बात की बड़ी खुशी हैं , ब्लॉग की हमारी यह दुनिया अच्छे लोगों से भरी हैं. मेरी  कहानी और लेखों को पढ कर मुझे  कुछ  अनमोल सुझाव मिले. जो मैं आप सबों के साथ बाँटना चाहती हूँ.

इस रंगीन दुनियाँ में सब ओर रंग बिखरे हैं. पर सफ़ेद पर काले लिखावट ही आँखों को सुकून देते  हैं.

लेख को ज्यादा  सजावट, बनावटी बना देता हैं. अतः स्वभाविकता बना रहे इसका ख़याल रखें.

 बोल्ड और स्वभाविक अक्षरों के प्रयोग से अपनी भावनाओं को ज्यादा सही तरीके से व्यक्त किया जा  सकता हैं. अपनी बात को स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने में बोल्ड अक्षर सहायक होते हैं.

 

 

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मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #2

मोबाईल के छुट्टी माँगने के भयंकर सपने से जागते ही मैंने उसे अपने कलेजे से लगा लिया. अब  वह हमेशा मेरे दिल के करीब रहता. शर्ट के ऊपर के पाकेट में उसका आशियाना बन गया.

इतने पर भी मेरे दिल को  तसल्ली नहीँ हुई.  मोबाईल के छुट्टी पर जाने की कल्पना से अक्सर दिल डर से धड़कने लगता. लोगों ने कहा धडकी की बीमारी हो गई हैं मुझे. बड़ा टोना टोटका चला. किसी ने हौलदिल पहनने  कहा. मैं  सीधे डॉक्टर के पास पहुँचा.

दिल का हाल अच्छा नहीँ था. मुझे सख्त आराम का निर्देश देते हुये मेरी दुनिया और मोबाईल से मुझे अलग कर, अस्पताल में भर्ती कर दिया गया.

वहाँ सचमुच मुझे बड़ी शान्ति और सुकून मिला. ना बार बार की घंटी की आवाज़ ना उसे चार्ज करने का तनाव.

घर वापस आ कर  बार बार बजती मोबाईल मुझे बड़ी नागवार गुजरी. तभी मेरे मोबाईल ने बड़े व्यंग से पूछा – क्यों , अब समझ आया ? क्यों मैं छुट्टी माँग रहा था? या फिर से अस्पताल जाने और डाक्टर को पैसे देने की मर्जी हैं ?
  

 (हौलदिल – संग यशब नाम के चौकौर पत्थर के टुकडे   पर कुरान की  एक विशेष आयत खुदी  रहती हैं. इसे रोगोंबाधा  दूर करने के लिये पहना जाता हैं.)

 WHO and various institutions have found   negative effect of excessive use of mobile  on our health.

 

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