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जिंदगी के रंग-16 कविता

 

जिंदगी इम्तिहान लेती है,

पर सबक भी देती है।

अगर

सही सबक लिया जाए।

जितना ज्यादा दर्द जिंदगी देती है

उतना ही, दर्द को

समझने की समझ भी देती है।

गर

ठीक से पढ़ें जिंदगी के पन्नों को……..

 

 

 

image from internet.

 

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बेमौत मरती नदियां -कविता Dying Rivers- poem

river.jpg

The river’s ecosystem has left 65 percent of the world’s rivers in danger of losing biodiversity due to various factors.   The Sarasvati River is one of the main Rigvedic rivers mentioned in the scripture Rig Veda and ancient Sanskrit texts. Around ,  70 per cent of the sites that have been discovered to contain archaeological material dating to this civilization’s period are located on the banks of the now dried out Saraswati river.

 

पौराणिक कथा के अनुसार सरस्वती नदी शुष्क हो तिरोहित हो गई। इसका गहरा प्रभाव मानव जाति पर पड़ा। वर्तमान सूखी हुई सरस्वती नदी के समानांतर खुदाई में ५५००-४००० वर्ष पुराने शहर मिले हैं जिन में पीलीबंगा, कालीबंगा और लोथल भी हैं। यहाँ कई यज्ञ कुण्डों के अवशेष भी मिले हैं, जो महाभारत में वर्णित तथ्य को प्रमाणित करते हैं।ऋग्वेद के नदी सूक्त के अनुसार यह पौराणिक नदी पंजाब के पर्वतीय भाग से निकलकर कुरुक्षेत्र और राजपूताना से होते हुए प्रयाग या इलाहाबाद आकर यह गंगा तथा यमुना में मिलकर पुण्यतीर्थ त्रिवेणी कहलाती है।

 

 हम,

प्रकृति से   लेना जानते हैं पर संभालना नहीं जानते।

ना अपना भविष्य ना  अपने संतति का भविष्य,

ना इतिहास से सबक लेना चाहते है।

पौराणिक कथा के अनुसार सरस्वती नदी

शुष्क हो तिरोहित हो गई।

इस नदी के साथ ना जाने कितने

 ज्ञान , विज्ञान , सभ्यतायें लुप्त हो गईं ।

                                                          कितने नासमझ हैं हम?

 

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वृंदावन की वृध्द विधवायेँ – कविता  Widows of Vrindavan 

( मान्यता हैं कि वृंदावन , वाराणसी आदि में शरीर त्यागने से मोक्ष के प्राप्त होती हैं. इसलिये प्रायः इन स्थानों पर विधवायें आ कर सात्विक जीवन बसर करती हैं अौर अपने मृत्यु का इंतजार करती हैं। यहाँ इन्हें अनेकों बंधनों के बीच जीवन व्यतीत करना पड़ता हैं। इस वर्ष (2016) पहली बार होली खेलने के लिये कुछ मंदिरों ने अपने द्वार इन विधवाओं के लिये खोल दिये. )

वृंदावन और कान्हा की मुरली
सब जानते हैं।
वृंदावन की होली
सब जानते हैं।
पर वहाँ कृष्ण को याद करती
सफेदी में लिपटी विधवाओ की टोली
किसने देखी हैं ?
आज़ जब पहली बार
उन्हों ने खेली फूलों की होली।
सफेदी सज गई गुलाबो की लाली से
कहीँ बज उठी कान्हा की मुरली
उनकी उदास साँसो से।

widows of vrindavan

Source: वृंदावन की वृध्द विधवाये ( कविता )

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जिंदगी के रंग- कविता 15

News PUNENewsline , Tuesday, MARCH 7, 2017

SSC Exam, Fearing paper leak cases,

 

फिसलते हुए वक्त को रोकना बस में नहीं है

जितना पकड़ो,

रेत की तरह मुट्ठी से रिस जाता है

बस बदलता ही रहता है  यह वक्त,

जिंदगी के  नये नये  परीक्षाअों  के साथ।

कितना भी पूछ लो पंडित नजूमियों से आगे क्या होगा???

कोई जवाब नहीं मिलता,

वक्त अौर जिंदगी में आगे क्या होगा ?

पर यह इंसान भी क्या चीज है,

खुद ही परीक्षा लेता है अौर

अक्सर  परीक्षा के पर्चे, परीक्षा से पहले

चंद सिक्कों के लिये  बेच दिया करता  हैं…………

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फ़ीनिक्स या मायापंछी ? -कविता Phoenix-poetry

In Greek mythology, phoenix   is a long-lived bird that is cyclically regenerated or reborn. Associated with the Sun, a phoenix obtains new life by arising from the ashes . may symbolize renewal

फ़ीनिक्स एक बेहद रंगीन पक्षी  होता है । जिस की चर्चा प्राचीन मिथकों व दंतकथाओं में पाया जाता है।  माना जाता है कि  वह मर कर भी राख से पुनः जी उठता है।

phoenix  1.jpg

एक लड़की भीगी आंखों वाली।

उसकी भीगी आंखें जैसे,

अोस भरी भीगी रातें हो।

थोड़ी   जिद्दी, थोङी हैरान-परेशान,

माया पंछी की तरह मायावी।

लड़ती झगड़ती दुनिया की अनुचित बातों से,

फिनिक्स

की तरह हर बार फिर से उठ जाती

पता नहीं कहां से वह शक्ति लाती

कितनी बार  राख से पुनर्जन्म लेने की काबलियत है उसकी?

हर बार, हर बार………..पर  कितनी बार……..?

कौन जाने कितनी बार??????????

 

 

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जिंदगी के रंग 14 – कविता

if you experience the love, you have to touch the spirit, not the body.
~ Rumi

 

            भूलने की कुछ आदत सी हो गई है………..

जिंदगी की जद्दोजहद में।

डर लगता है कभी,

अपने आप को हीं न भूल जाऊँ।

अगर कभी तुम्हें भूल गई तो,

शिकवे गिले न करना

               बस धीरे से याद दिला देना  !!!!!!!!!

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धोखा और फरेब-कविता Deception- poetry

Kerala mangoes arrive early this year – growers expect them to be ready by the second week of March. ( News; indianexpress, Mon, Feb 13, 2017)

Research reveals that global warming is compelling birds into early migration. Migrating birds are arriving at their breeding grounds earlier as global temperatures rise.

धोखा और फरेब हमने किस- किस को सिखा दिया है?

प्राकृति को देखकर

 लगता है क्या कभी हम भी ऐसे थे

पवित्र- पावन, सच्चे?

अब तो करवटें बदलते मौसम ने भी

रंग दिखाना शुरु कर दिया  है

समय से पहले  प्रवासी पंछी उड़कर आने जाने लगे हैं

फल – फूल भी मौसम से पहले खिलने फलने लगे हैं

क्या हमसे यह धोखा फरेब मौसम ने भी सीख लिया है?

Image courtesy Chandni  Sahay.