Miracle of sound -Chladni plates

How sound waves make patterns on light weight particles of sand. The patterns formed by Sound Vibrations are known as Chladni  Figures, so named after the famous German Physicist and Musician Ernst Chladni.

Now imagine, how mantras makes impact on us . And when we are receptive, and ready, we do get positively influenced by vibrations.

 

(Special thanks to senior blogger Mr R K Karnani for sharing the information about Chladni  Figures.)

Forwarded as received.

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Parents are under enormous pressure to kill children with disabilities: study

According to the study conducted by Disability Rights International (DRI) and Kenyan Association for the Intellectually Handicapped (KAIH), 37 per cent of the women surveyed from Nairobi said they were pressured to kill their disabled children.

courtesy. : https://www.google.co.in/amp/s/www.standardmedia.co.ke/mobile/amp/article/2001297121/mothers-urged-to-kill-their-children

क्या आपके बच्चे पढ़ाई पर कम ध्यान दे रहें हैं ?

बच्चों की मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाएं जन्म से लेकर किशोरावस्था के अंत तक  विकसित होते हैं। जिससे वे सारी बातें सीखते हैं।  हर बच्चा दूसरे बच्चे से  भिन्न हो सकता हैं। बच्चों और किशोरों के साथ भावनात्मक या व्यवहारिक समस्याओं को समझना अौर हल करने में मदद  करना जरुरी है। इस बात का अभिवावकों को समझना चाहिये क्योंकि यह उनके सीखने का समय है। बच्चे जब कुछ गलत करें तब —
सावधानियाँ
– डाँटें या मारे नहीं, प्यार से पेश आयें।
– उनसे खुल कर बातें करें।
– उनकी योग्यता के अनुसार अपनी उम्मीद रखें। प्रत्येक बच्चे में अलग-अलग योग्यता होती है।
– उनकी बातों का सम्मान करें।
-हमेशा उन्हें नापे -तौलें/ judge नहीं करें।
– उनकी परेशानियाँ पूछें
– उनके साथ समुचित समय / quality time बिताएँ.
– बारीकी से उनके व्यवहार पर ध्यान दें.
– अगर उन्हें कोई समस्या है , तब उसे समझने और जानने की कोशिश करें .
– स्वास्थ्य, सही भोजन, व्यायाम, समुचित खेल-कूद, नींद पर ध्यान दें.
– स्कूल , शिक्षकों और दोस्तों से कैसे संबंध है , यह जाने .
– परिवार में आपसी संबंध कैसा है, यह भी महत्वपूर्ण है.
उपाय –
– उनकी समस्याओं को समझे और सुलझाएँ .
– सहानुभूति के साथ पेश आयें.
– प्रेरित करें
– भावात्मक सुरक्षा दें
– उनकी पढ़ाई, व्यायाम, समुचित खेल-कूद, नींद , मनोरंजन का रुटीन उनके साथ बैठ कर बनायें। उनके सुझावों का सम्मान करें।
– उनके लिये आसान अौर अल्पकालिक लक्ष्य / short term goal बनायें।
– बच्चे  ज्यादातर बातें अनुकरण से सीखते हैं। अपने व्यवहार पर भी ध्यान दें। अगर आप का काफी समय मोबाईल पर या  टीवी के सामने बितता है । तब जाने-अनजाने यह मैसेज बच्चों में भी जाता है।
(किसी  के अनुरोध पर लिखा गया पोस्ट)

Children Learn What They Live

If a child lives with criticism, they learn to condemn.

If a child lives with hostility, they learn to fight.

If children live with fear, they learn to be apprehensive,

If children live with pity, they learn to feel sorry for themselves,

If a child lives with ridicule, he learns to be shy.

But do not despair …

If a child lives with tolerance, they learn to be patient.

If a child lives with encouragement, they learn confidence.

If a child lives with praise, they learn to appreciate.

If a child lives with fairness, they live with justice.

If a child lives with security, they live to have faith.

If a child lives with approval, they learn to like himself.

If a child lives with acceptance and friendship.
they learn to find love in the world.

— Dorothy Law Nolte

गणपती क्यों बिठाते हैं?

हर साल गणपती की स्थापना की जाती है . ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की है। इसे लिखना कठिनथा। अतः उन्होंने श्री गणेश जी की आराधना की और गणपती जी से महाभारत लिखने की प्रार्थना की।

गणपती जी ने सहमति दी और अनवरत लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ . थकान और भूख प्यास से गणेश जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की।

मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पर्थिव गणेश भी पड़ा।

महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला।अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ।वेदव्यास ने देखा कि, गणपती का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है, तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया।

इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए।तभी से गणपती बैठाने की प्रथा चल पड़ी। इन दस दिनों में इसीलिए गणेश जी को पसंद विभिन्न भोजन अर्पित किए जाते हैं।।

Courtesy- google

Autosuggestion

Meditation, chanting mantras, affirmations are types of auto suggestion. Practising these can do wonders by helping you control your life in a positive way.

Autosuggestion is a psychological technique related to the placebo effect. It is a form of self-induced suggestion in which individuals guide their own thoughts, feelings, or behavior.

In truth, auto suggestion is the simplest and the most powerful of mind programming tools. It is one of those simple mind power techniques  that is easy, always accessible, can be done anywhere any time (even while driving) and requires no special skill or training.

Courtesy:

1. https://en.m.wikipedia.org/wiki/Autosuggestion

2. https://www.mindtosucceed.com/auto-suggestion-techniques.html