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कन्या पूजन ( कविता )

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 5

 

नवरात्रि की अष्टमी तिथि ,
प्रौढ़ होते, धनवान दम्पति ,
अपनी दरिद्र काम वालियों
की पुत्रियों के चरण
अपने कर कमलों से
प्यार से प्रक्षालन कर रहे थे.

अचरज से कोई पूछ बैठा ,
यह क्या कर रहें हैं आप दोनों ?

अश्रुपूर्ण नत नयनों से कहा –
“काश, हमारी भी प्यारी संतान होती.”
सब कुछ है हमारे पास ,
बस एक यही कमी है ,

एक ठंडी आह के साथ कहा –
प्रायश्चित कर रहें है ,
आती हुई लक्ष्मी को
गर्भ से ही वापस लौटाने का.

Source: कन्या पूजन ( कविता )

Image – Sundarban temple,

by Rekha Sahay.

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मैं एक लड़की ( कविता 1 )

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 4

 

इस दुनिया मॆं मैने
आँखें खोली.
यह दुनिया तो
बड़ी हसीन
और रंगीन है.

मेरे लबों पर
मुस्कान छा गई.
तभी मेरी माँ ने मुझे
पहली बार देखा.
वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया

और बोली -लड़की ?
तभी एक और आवाज़ आई
लड़की ? वो भी सांवली ?

Source: मैं एक लड़की ( कविता 1 )

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तरीके और हथियार ( कविता )

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 3

 

उसके पति ने कहा ,
सजावट की तरह रहो ,
कौन तुम्हें मदद करेगा ?
यह पुरुषों की दुनियाँ हैं.
सब के सब , कभी न कभी
ऐसे रिश्ते बनाते हैं.
अगर तुमने मेरी जिंदगी मॆं
ज्यादा टाँग अडाई ,
तब सब से कह दूँगा –
यह औरत पागल हैं.

उसने नज़रें उठाई और कहा-
सब के सब तुम्हारे जैसे नहीँ हैं.
तुम्हारे ये तरीके और हथियार पुराने हो गये ,
मुझ पर काम नहीँ करते.
हाँ , जो तुम जैसे हैं ,
वहीं तुम्हारा साथ देते हैं.

मैं नारी हूँ, रानी हूँ, शक्ति हूँ।
इसलिये शर्मिंदा होने का समय तुम्हारा हैं.
मेरा नहीँ.

आज़ के आधुनिक समय में अभी भी कुछ ऐसे लोग मिल जाते हैं , जो नारी को समानता का दर्ज़ा देने में विश्वाश नही रखते.

Source: तरीके और हथियार ( कविता )

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अभिमन्यु की तरह (कविता) poem of an unborn baby

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 2

 

चक्रव्यु तोङने वाले ,

अभिमन्यु की तरह सुनती वहाँ,

बाहर की बातें –

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,

मुझे नहीं पता, मैं कौन हूं? बेटा या बेटी ?

पर बङे शुकून से मैं थी वहाँ,

सबसे सुरक्षित, महफूज।

तभी, एक दिन किसी ने प्रश्न किया –

बेटा है या बेटी ?

आवाज आई – बेटी !!

धीमा सा उत्तर आया – नहीं चाहिये, गिरा दो ।

 

Source: अभिमन्यु की तरह (कविता) poem of an unborn baby

 

Image from internet.

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चेहरा नहीं तो भाग्य तो सुन्दर होता (कविता)

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 1

वह कभी आइने में अपना सुकुमार सलोना चेहरा देखती

कभी अपनी माँ को।

दिल में छाले, सजल नेत्र, कमसिन वयस, अल्पशिक्षित

कुछ माह की विवाहिता,

पति के चरित्रहिनता व बदमिजाजी से तंग,

वापस आई पिता ग़ृह, अपना घर मान कर।

माँ ने वितृषणा से कहा –

पति को तुम पसंद नहीं हो।

तुम्हारा चेहरा नहीं, कम से कम भाग्य तो सुन्दर होता।

वह हैरान थी, माँ तो विवाह के पहले से जानती थी

उसके ससुराल की कलकं-कथा,

अौर कहा था – घबराओ नहीं,

जल्दी हीं सुधर जायेगा।

“मेहंदी रंग लायेगी”

फिर आज़ यह उसके भाग्य अौर चेहरे की बात कहां से आई?

Source: चेहरा नहीं तो भाग्य तो सुन्दर होता (कविता)

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मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology

An ode to every women, An ode to  She the Shakti

                    A poetic celebration of femininity, A chorus of change.

                                       ।।300 Poems by 124 Poets।।

It is an anthology, edited by Meenakshi M Singh. The intent of this book is to empower women’s voice through the potent medium of poetry.   My five poems are published  in the Hindi section of the book.

                                                 

    स्त्री – एक शक्ति

यह मीनाक्षी सिंह द्वारा संकलित एक काव्य संग्रह है। यह   संकलन  महिलाअों के आवाजों की अभिव्यक्ति कविता के माध्यम कर रही है।  जिसमें 124 कवि अौर कवित्रियों ने 300 कवितायों में  अपने विचारों को अभिव्यक्त कियें है।  मेरी पाँच कवितायों को भी इसमें शामिल कर मुझे सम्मानित किया गया है।

मेरी कवितायें —

  1. अभिमन्यु की तरह   

    2.    तरीके और हथियार 

    3.  चेहरा नहीं तो भाग्य तो सुन्दर होता

   4. मैं एक लड़की  

  5.  कन्या पूजन  

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मेरा ब्लॉग -“नरेटिवे ट्रांसपोट ” या “परिवहन कल्पना मॉडल” ( मेरे ब्लॉग के नाम के विषय में )

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मेरा ब्लॉग –“नरेटिवे ट्रांसपोटेशन ” या “परिवहन कल्पना मॉडल” के नाम से है।नाम कुछ अलग सा है। इसलिए मैं इस बारे में कुछ बातें करना चाहूंगी।


कभी-कभी हम किसी रचना को पढ़ कर उसमें डूब जाते हैं। उसमें  खो जाते हैं। उस में कुछ अपना सा लगने लगता है।

ऐसी कहानी या गाथा जो आप को अपने साथ बहा ले जाये।  इसे “कथा परिवहन अनुभव” या “नरेटिवे ट्रांसपोटेशन कहते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक  मनः  स्थिति होती है।

मैं चाहती हूँ कि मेरे रचनाओं को पढ़ने वाले पाठक भी ऐसा महसूस करें। इसमें हीं मेरे लेखनी की सार्थकता है। शब्दों का  ऐसा मायाजाल बुनना बहुत कठिन काम है। फिर भी मैं प्रयास करती रहती हूँ। अगर मेरा यह प्रयास थोड़ा भी पसंद आए। तब बताएं जरूर। यह मेरा हौसला  बढ़ाएगा।

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