Posted in poem, Uncategorized

canine emotions- Poem

Canine Emotions –   Do you know,  an adult dogs’ mental level  is of  around 3 years old child and   have all of the basic emotions , such as : joy, fear, anger, disgust, and love.  It is also called canine emotion.

 

I think dogs are the most amazing creatures; they give unconditional love. For me, they are the role model for being alive.
—Gilda Radner

हम  हर बात में लाभ-हानी, अपना-पराया दैखते हैं।

परेशानी में कम ही हाथ मदद के लिये आगे बढ़ते हैं।

 बिना शर्त प्रेम या अनुराग इनमें दिखता है।

यह प्रेम बिना भाषा के  अपना रास्ता खोज लेती है।

2017-06-02 20.57.21.jpg

Images courtesy  Chandni Sahay

 

 

Advertisements
Posted in anuvhav, मानव व्यवहार, experience, hindi gender difference, hindi poem, honor killing, human behaviour, poem, story on women

तो लोग क्या कहेगें? (कविता)

eyes

पूरे आस-विश्वास के साथ वह लौटी  पितृ घर,

           पिता की प्यारी-लाङली

          पर ससुराल की व्यथा-कथा सुन,

        सब ने कहा- वापस वहीं लौट  जा।  

                किसी से कुछ ना बता,

                 वर्ना लोग क्या कहेगगें ?

इतने बङे लोगों के घर की बातें बाहर जायेगी, तो लोग क्या कहेगें?

(  लोग सोचतें हैं, घर की बेटियों को परेशानी में पारिवारिक सहायता मिल जाती है। पर पर्दे  के पीछे झाकें बिना सच्चाई  जानना मुशकिल है। कुछ बङे घरों में  एेसे भी ऑनर किलिंग होता है)

 

छाया चित्र इंटरनेट के सौजन्य से।

Posted in poem, Uncategorized

राग वीतराग (काविता)

राग-वितराग
राग-वितराग

जीवन के मधुर राग में ,
वीतराग भर जाता हैं  ,
जब अपनो के ही बदलते रंग,
जीवन बेरंग कर देते हैं.
क्या यही  हैं वैराग्य का द्वार ?

 

Image by Chandni Sahay.

Posted in ecology, environment, poem, tree

जिंदगी के रंग (1) ज़िंदगी रोज़ नए रंग दिखाती है हमें ( कविता )

tree

ज़िंदगी रोज़ नए रंग दिखाती है हमें
दूर खड़ा फूलों भरा, हरा भरा,

पुराना दरख्त समीर के झोंकों में झूम रहा था।
नीचे खेलते बच्चे किलक रहे थे।
ड़ालों पर पंछी चहक रहे थे।
जिंदगी के रंग कितने सलोने है।

तभी पेड़ चीख़ उठा। उस से भी तेज़ चीख़ें आईं
ऊपर नीड़ों से, और गोल-गोल उड़ते पंछियो की।
कोई उसे बेरहमी से काट रहा था,

शायद सीमेंट-बालू के नीड़ बनाने के लिए।
आसपास के पेड़ सन्न देख रहे थे,
क्या इसके बाद हमारी बारी है? सोच रहे थे।
पेड़ धरा पर पड़ा था, फूल टूट-टूट कर बिखर गए थे।

हमें हमेशा लगता है, दुर्घटनाएँ दूसरों के साथ हीं होते है
पर ऐसा नहीं है। जिंदगी रोज़ नए रंग दिखाती है हमें।
हम हीं भूल जाते है, कभी-कभी गहरी जड़ें भी सहारा नहीं दे पातीं हैं हमें,

image from internet.